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श्री जुड़ेश्वर प्राचीन महादेव मंदिर आस्था का केंद्र बना

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जुड़ेश्वर प्राचीन महादेव मंदिर आस्था का केंद्र बना
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मोरना। जुड़ेश्वर प्राचीन महादेव मंदिर आस्था का केंद्र बना हुआ है। आसपास के हजारों शिवभक्त भगवान आशुतोष का जलाभिषेक कर पुण्य कमाते चले आ रहे हैं। मंदिर के गर्भ में स्थित शिव पिंडी के दर्शन करते ही दुखों का निवारण हो जाता है। वहीं, मंदिर के शिखर से मंदिर के मध्य तक बनाई गई शिव पिंडी को कमल की पंखुड़ियों से ढका गया है, जिससे मंदिर की भव्यता में चार चांद लग गए हैं।
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मंदिरों को सजाने के लिए एक सप्ताह से तैयारियों का आरंभ कर दिया जाता है। शिवरात्रि के दौरान मंदिर की सजावट देखते ही बनती है। मोरना व भोपा मार्ग पर गांव ककराला स्थित जुड़ेश्वर प्राचीन महादेव मंदिर में हजारों साल से पूजा अर्चना होती चली आ रही है। मंदिर कमेटी के पदाधिकारी व ग्रामीण सोहनवीर सिंह, वीरेंद्र भगत, कृष्णपाल सिंह, खिलेंद्र, जयद्रथ, संजय माहेश्वरी, शैलेश शर्मा आदि ने बताया कि यह स्थान जुड़वन के नाम से जाना जाता था। भगवान शिव की विशेष पत्थर की बनी शिव पिंडी मिलने पर मंदिर का निर्माण आरंभ किया गया। राजा शेरशाह सूरी और हुमायूं के बीच युद्ध हुआ था, जिसमें हुमायूं की सेना की हार होने पर उन्होंने मंदिर में चल रही कीर्तन के बीच आकर शरण ली थी। 1984 से मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर गांव ककराला के बुजुर्ग जसबीर सिंह, जबर सिंह, घसीटा सिंह, हजारी पंडित आदि ने पहल प्रारंभ करते हुए मंदिर प्रांगण में कार्य कराना आरंभ किया। इसके बाद नई कमेटियों के संरक्षण में मंदिर को भव्यता प्रदान करने का कार्य जोर शोर से प्रारंभकिया गया। कारीगरों के सधे अंदाज से मंदिर के ऊपरी हिस्से को कमल की पंखुड़िय़ों का आकार देकर उनके नीचे 32 शिव पिंडियों को विशेष प्रकार से बनाया गया है। मोरना मिल के परिवारों सहित गांव इस्सोपुर, ककराला करहेड़ा, मोरना, भेडाहेड़ी, चौरावाला, वजीराबाद, छछरौली, आदि के हजारों कांवड़िए भगवान आशुतोष का जलाभिषेक कर पुण्य कमाते हैं।
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