500 शब्दों से अधिक में सूचना मांगना गलत: आयुक्त
मुजफ्फरनगर। राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने कहा कि 500 शब्दों से अधिक में प्रार्थना पत्र देकर यदि कोई सूचना मांगता है तो उसका आवेदन निरस्त किया जा सकता है। अपीलीय अधिकारी यदि एक सप्ताह में एक बार भी दोनो पक्षों को आमने-सामने बुलाकर सुनवाई करे तो आयोग के सामने जाने की आवश्यकता न पड़े।
जिला पंचायत के सभागार में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक के बाद पत्रकारों से वार्ता में उस्मान ने कहा कि आरटीआई गरीब और आम आदमी के लिए एक हथियार है। इस समय सूचना अधिकार का 40 प्रतिशत प्रयोग सरकारी कर्मचारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सूचना मांगे जाने के तीस दिन के अंदर आम आदमी को सूचना मिल जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अपीलीय अधिकारी प्रत्येक सप्ताह में एक दिन भी दोनो पक्षों को सुनने के लिए निकाल ले तो आयोग के सामने जाने वाले लोगों की संख्या घट जाएगी। आयुक्त ने कहा कि सूचना मांगने के लिए 500 शब्दों से ज्यादा का प्रयोग नहीं होना चाहिए। यदि ज्यादा शब्दों में आवेदन है तो उसे निरस्त किया जा सकता है। बीस साल से पुरानी सूचना नहीं मांगी जा सकती। किसी की व्यक्तिगत जिंदगी के बारे में सूचना नहीं पूछी जा सकती है। क्या, क्यों और कैसे शब्दों का प्रयोग हम सूचना मांगते समय नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने सूचना मांगने को व्यापार बना लिया, ऐसे लोगों को चिह्नित कर उन पर कार्रवाई भी होती है। राज्य सूचना आयोग अब सूचनाओं के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग का इस्तेमाल करेगा। सहारनपुर जिले से इसकी शुरुआत होने जा रही है। इससे पूर्व उन्होंने अधिकारियों की बैठक में सूचना से संबंधित विभिन्न जानकारी दी। डीएम राजीव शर्मा, एसएसपी अनंतदेव, सभी एसडीएम, विभागों के अधिकारी और पुलिस अधिकारी बैठक में शामिल रहे।