मुजफ्फरनगर कांड के बाद बदले राजनीतिक परिदृश्य से उपजी आशंका से सपा नेतृत्व खासा विचलित है। उसे डर है कि यदि मुलायम-मुस्लिम गठबंधन की गांठ ढीली हुई तो लोकसभा चुनाव में पार्टी को बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
मुस्लिमों से रिश्ते न दरकें इसके लिए सपा नेतृत्व का खासा जोर लोगों को यह यकीन दिलाने पर है कि सांप्रदायिक ताकतों से लड़ने की कुब्बत सिर्फ सपा में है।
यहां राजकीय मेडिकल कॉलेज के शिलान्यास के मौके पर हुई विकास रैली में सपा सुप्रीमो ने जो कुछ कहा, उसका लब्बोलुआब भी यही था कि अगर मुसलमानों का कोई हिमायती है तो वह सिर्फ मुलायम सिंह यादव ही हैं। प्रदेश में भाजपा को रोकने में सिर्फ सपा ही सक्षम है।
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जहां अपना भाषण विकास और सरकार की उपलब्धियों पर केंद्रित रखा वहीं मुलायम सिंह यादव ने यहां की अवाम को उससे अपने रिश्तों की याद दिलाते हुए बात शुरू की।
उनके भाषण में विरोधियों के लिए पहले जैसी तल्खी और तेजी भले ही न रही हो लेकिन मुसलमानों को रिझाने-लुभाने के लिए शब्दों की बाजीगरी भी थी और राजनीतिक जादूगरी भी। उन्हें जो कहना था वह तो कहा ही लेकिन कुछ ऐसा भी कह गए जो व्यवस्था पर ही सवाल खड़ा करता है।
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मुलायम सिंह यादव ने अपने भाषण की शुरुआत बदायूं के पिछड़ेपन का खाका खींचते हुए की। बोले, बदायूं की पहचान धूल भरे शहर के रूप में होती थी। उन्होंने जब गुन्नौर सीट से विधानसभा में बदायूं की नुमाइंदगी की तो फिर यहां की तस्वीर ही बदल गई। सड़कें बनीं। हर गांव में स्कूल बना। पानी का बंदोबस्त हुआ। कछला का पुल बना। चीनी मिल लगी और अब मेडिकल कॉलेज बन रहा है।
मुसलमानों को भाजपा का खौफ दिखाते हुए मुलायम सिंह असल मुद्दे पर आए। बोले, बीजेपी मुसलमानों के खिलाफ है। गुजरात के अंदर मोदी ने मुसलमानों का कत्लेआम कराया। वह मानवता का हत्यारा है। सपा मोदी को वापस गुजरात भेजकर ही दम लेगी। प्रदेश की जनता साथ है तो यह मुमकिन भी है। केंद्र में सरकार बनेगी तो बिना सपा के नहीं बनेगी।
मुजफ्फरनगर के दंगा पीड़ितों को प्रदेश सरकार ने जो मदद दी है वह इससे पहले कभी किसी दंगे के दौरान किसी सरकार ने नहीं दी। पीड़ित परिवारों को सात लाख से लेकर दस लाख रुपये तक दिए गए हैं। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद सरकार ने हर थाने में तीन-चार मुसलमान सिपाही तैनात कर दिए हैं। दरअसल मुसलमानों को पीएसी पर भरोसा नहीं रह गया है। थानों में मुसलमान सिपाहियों को तैनात करने के पीछे मंशा है कि वह हिंदू सिपाहियों के साथ रहेंगे, साथ खाएंगे। एक-दूसरे के सुख-दुख में शरीक होंगे तो भाईचारा कायम होगा।
मुलायम सिंह इस दौरान सच्चर कमेटी की रिपोर्ट का जिक्र करना भी नहीं भूले। बोले, सच्चर कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में मुसलमानों की दलितों से भी बुरी हालत बताई है। उन्हें विशेष सुविधाएं देने की वकालत की गई है। पूरे हिंदुस्तान में उत्तर प्रदेश इकलौता सूबा है जहां मुसलमानों को विशेष सहूलियतें और सुविधाएं दी जा रही हैं। पुलिस की भर्ती में उन्हें खास तरजीह दी जा रही है। मुसलमानों की सुविधा, सुरक्षा और सम्मान के लिए भले ही कोई उन्हें मुल्ला मुलायम कहे लेकिन वह उनकी मदद करते रहेंगे।
शुक्रवार को न करें पार्टी का कोई कार्यक्रम
सब कुछ कह लेने के बाद मुलायम सिंह यादव ने मुसलमानों के प्रति सपा की वफादारी साबित करने के लिए मंच से पार्टी का कोई कार्यक्रम शुक्रवार को न करने का ऐलान कर दिया। बोले, आगे से शुक्रवार को कोई सभा न रखें, नमाज की वजह से हमारे लोग नहीं आ पाते हैं।
बदायूं में शिलान्यास और विकास रैली के लिए शुक्रवार का दिन बिना उनकी जानकारी के तय कर लिया गया था। अगर उन्हें पता होता तो कार्यक्रम के लिए शुक्रवार के बजाय कोई और दिन निश्चित कराते।