उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और कुंडा के विधायक राजा भैया ने सीओ जियाउल हक की हत्या के मामले में सीबीआई से क्लीन चिट मिलने पर मुलायम सिंह और अखिलेश यादव समेत सभी शुभचिंतकों का आभार जताया।
उन्होंने कहा कि ‘नेताजी’ और मुख्यमंत्री से उनके वैसे ही रिश्ते हैं जैसे पहले थे। वे मेरे संघर्ष के साथी है। उन्होंने कहा, मेरे खिलाफ दर्ज एफआईआर ही तकनीकी तौर पर दोषपूर्ण थी।
सीबीआई जांच में बेदाग साबित होने के बाद प्रदेश के पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह के साथ पत्रकारों से रूबरू हुए राजा भैया ने कहा कि उन्होंने शुरुआत जो कहा था, वह सच साबित हुआ।
उन्होंने कहा था कि सीओ की हत्या दुर्भाग्यपूर्ण आकस्मिक घटना थी। घटना के बाद उनके खिलाफ दर्ज रिपोर्ट गलत थी। घटना की प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) एक थानेदार लिखा चुके थे। एफआईआर एक होती है लेकिन उनके खिलाफ दूसरी एफआईआर दर्ज की गई। जिस महिला ने अपना पति खोया दिया हो, उनकी मानसिक स्थिति कैसी होती है, सभी जानते हैं। ऐसे में जिन्होंने साजिश को हवा दी उन्होंने अच्छा नहीं किया।
साजिशकर्ता कौन थे? इस सवाल का राजा भैया ने सीधे जवाब नहीं दिया। लेकिन इतना जरूर कहा कि साजिश में कोई सपा नेता शामिल नहीं था। उन्होंने बताया कि सीबीआई ने उनसे 28 घंटे पूछताछ की। 20 घंटे कुंडा और आठ घंटे दिल्ली में।
पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट की उन्होंने खुद सहमति दी ताकि सच सामने आ जाए। उन्हें खुशी है कि देश की सबसे बड़ी एजेंसी ने घटना के पांच माह बाद अपनी क्लोजर रिपोर्ट में उन्हें बेदाग, निरपराध और निर्दोष बताया। उन्होंने कहा कि कुंडा की हर घटना को उनसे न जोड़ें।
परवीन पर केस के लिए समर्थकों से सलाह करेंगे
राजा भैया ने कहा कि मरहूम सीओ की पत्नी पर मानहानि के लिए कोई कार्रवाई करनी चाहिए या नहीं, इसका फैसला वह समर्थकों और क्षेत्रवासियों से बात करने के बाद ही करेंगे।
मंत्री बनाना मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार
बेदाग साबित होने के बाद क्या फिर से मंत्री बनेंगे? इसके जवाब में राजा भैया ने कहा कि यह गलत आदमी से गलत सवाल है। मंत्री बनाना न बनाना मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार होता है।
पिछले मंत्रिमंडल विस्तार में जगह न मिलने पर कहा कि जिस कारण मंत्री पद छोड़ा था, उसमें जांच रिपोर्ट आने तक कैसे शपथ ले सकता था? उन्होंने अपने इस्तीफे को सही बताते हुए कहा कि उनके लिए मंत्री पद से ज्यादा महत्वपूर्ण प्रतिष्ठा है।