भाजपा ने योगी आदित्यनाथ को भले ही सबका साथ-सबका विकास नारे के साथ यूपी की बागडोर सौंपी हो, लेकिन योगी के ‘कमंडल’ में हमेशा गोवंशील पशुओं की तस्करी, हिंदुओं का पलायन, लव जेहाद, हज की सब्सिडी जैसे मुद्दे ही रहे हैं।
मुरादाबाद मंडल में भी इन मुद्दों को लेकर हमेशा विवाद होते रहे हैं। इसके अलावा केंद्र की योजनाओं को लागू करने में पक्षपात के आरोप विपक्षी दलों के स्थानीय नेताओं पर लगते रहे हैं। केंद्र की योजना से गांवों के ऊर्जीकरण में मनमानी का मामला गरमा चुका है, जिसे लेकर सांसद सर्वेश कुमार सिंह ने केंद्र सरकार से शिकायत भी की थी।
इस मामले को लेकर योगी आदित्यनाथ भी आक्रामक रुख अपना चुके हैं। योगी आदित्यनाथ की हिंदूवादी छवि चर्चित रही है। कट्टर छवि के कारण ही भाजपा अब तक योगी को मुख्य भूमिका में नहीं ला रही थी, लेकिन यूपी का मुख्यमंत्री बनाने के बाद लगता है कि पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया है।
अगर ऐसा है तो मुस्लिम बाहुल्य जनपदों की गिनती में शुमार मुरादाबाद, संभल, अमरोहा और रामपुर जिले में वे मुद्दे गरमाएंगे जिनपर योगी लगातार हमलावर रहे हैं। इन जिलों की 19 में से 9 विधानसभा सीटों पर भाजपा के विधायक चुने गए हैं। ऐसे में स्थानीय मामले भी जोरशोर से विधानसभा में उठेंगे।
राम गंगा के प्रदूषण का मुद्दा स्थानीय भाजपाई उठाते रहे हैं, लेकिन यूपी में सरकार न होने के कारण इस समस्या का समाधान नहीं हो सका। ई-कचरे के गोरखधंधे से भी लोग परेशान हैं। इसके अलावा गोवंशीय पशुओं की चोरी, अवैध कट्टीघर, हिंदुओं का पलायन, लव जेहाद जैसे मुद्दे अब ठंडे बस्ते में शायद न जाएं।
मुरादाबाद से हज जाने वालों की संख्या हमेशा अन्य स्थानों से ज्यादा रही है। योगी हज की सब्सिडी समाप्त करने की वकालत करते रहे हैं। यदि इन मुद्दों पर योगी सख्त रुख अपनाते हैं तो मंडल के साथ-साथ पूरा पश्चिमी उत्तर प्रदेश निशाने पर रहेगा।