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यज्ञ केवल वैदिक अनुष्ठान नहीं, आत्मशुद्धि, लोककल्याण का दिव्य माध्यम : रामेश्वरानंद

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कांठ। क्षेत्र के गांव मुख्त्यारपुर नवादा में देवी मंदिर पर चल रहे सात दिवसीय श्री जाम्भाणी महायज्ञ का रविवार को विधिविधान से समापन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुतियां देकर धर्म संवर्धन, विश्व शांति, जीवदया, पर्यावरण संरक्षण की कामना की और भंडारे में प्रसाद ग्रहण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
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इस सात दिवसीय विशेष महायज्ञ का आयोजन यज्ञाचार्य संत स्वामी रामेश्वरानंद महाराज के सानिध्य में किया गया। रविवार को अंतिम दिन भी उन्होंने जाम्भाणी पद्धति के अनुसार यज्ञ, सबदवाणी, पाहल, आरती आदि धार्मिक अनुष्ठान कराए। उन्होंने भगवान जाम्भोजी जी के लोकमंगलकारी सिद्धांतों का स्मरण कराते हुए संयम, जीवदया, प्रभुभक्ति धर्म, सदाचार को मानव जीवन की वास्तविक साधना बताया।
कहा कि यज्ञ केवल वैदिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, सामाजिक समरसता, नैतिक जागरण और लोककल्याण का दिव्य माध्यम है। अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य प्रदीप बिश्नोई एडवोकेट ने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक एवं संस्कारपरक आयोजन समाज में नैतिक चेतना, पारिवारिक एकता, सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करते हैं।
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दयानंद आर्य कन्या डिग्री कॉलेज की प्रोफेसर/जाम्भाणी साहित्य अकादमी बीकानेर की कार्यकारिणी सदस्य डॉ. छाया रानी ने कहा कि यदि हम भगवान जाम्भोजी द्वारा प्रतिपादित उनतीस नियमों एवं जीवन-मूल्यों को अपने आचरण में चरितार्थ कर लें, तो हमारा जीवन स्वतः ही धन्य, अनुशासित एवं कल्याणमय बन जाता है। इस दौरान 29 नियमों के पालन, नश की लत को त्यागने, जीवों पर दया करने, गोसेवा और पर्यावरण संरक्षण को वृक्षों को बचाने का संकल्प लिया गया। अंत में भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
अनुष्ठान में संत स्वामी योगानंद महाराज, संत राजूराम महाराज, राजवीर सिंह बिश्नोई, नीरज बिश्नोई, विष्णुदास बिश्नोई, श्रीओम सिंह बिश्नोई, राजपाल सिंह, सेवानिवृत्त शिक्षक आसाराम, रिटायर्ड उपनिरीक्षक रामावतार, सुखवीर सिंह, डॉ. राकेश बिश्नोई, ओमकार सिंह, विजयवीर सिंह, संजीव बिश्नोई, राजीव बिश्नोई, हैप्पी बिश्नोई, ओमवीर सिंह, राजपाल सिंह, रेखा देवी, अर्चना देवी, अंकिता देवी, संतोष देवी, विमला देवी, उषा देवी आदि बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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