इन्होंने कहा नो स्मोकिंग... और बदल गई जिंदगी
- धूम्रपान छोड़ने के बाद लोगों को ब्लड प्रेशर की समस्या से मिला छुटकारा, दवाइयां भी हुईं बंद
फोटो
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। विश्व में विभिन्न प्रकार की बीमारियों और उनसे होने वाली मौतों का दूसरा सबसे बड़ा कारण धूम्रपान है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 16 वर्षीय युवा से लेकर 80 वर्षीय बुजुर्ग तक धूम्रपान का सेवन करते हैं। आए दिन कई लोग सिगरेट की बुरी लत को छोड़ने का प्रयास करते हैं लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिलती।
वहीं शहर में कुछ ऐसे उदाहरण भी मौजूद हैं जिन्होंने स्मोकिंग छोड़कर अपनी जिंदगी बदल दी। इनमें से कुछ ऐसे हैं जिनकी ब्लड प्रेशर की समस्या सिगरेट छोड़ने के बाद खत्म हो गई। इतना ही नहीं बीपी, सिर दर्द और कई तरह की छोटी-छोटी दवाइयां जो इन लोगों को हर दिन लेनी पड़ती थीं, वह भी बंद हो गई हैं। इन लोगों को धूम्रपान छुड़ाने में स्वास्थ्य विभाग का तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम मददगार बना है। इस कार्यक्रम के नोडल डॉ प्रशांत के मुताबिक कई लोगों का इलाज अब भी चल रहा है। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें काउंसलिंग व दावों के बाद सिगरेट छोड़ने में समय तो लगा लेकिन आज वह स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। उन्हें किसी दवा की लत भी नहीं लगी है। आईए जानते हैं उन्हीं लोगों से कि कैसे छोड़ी उन्होंने स्मोकिंग।
केस-1
ब्लॉक परिसर चक्कर की मिलक निवासी अमरनाथ सिंह की उम्र 65 साल है। वह बताते हैं कि 30 साल की उम्र से वह सिगरेट पी रहे थे। धीरे-धीरे यह शौक लत में बदल गया और दिन में 20 सिगरेट तक पी जाते थे। ब्लड प्रेशर, कम नींद और सिर दर्द जैसी परेशानी महसूस हुई तो उन्होंने डॉक्टर से संपर्क करा। उन्होंने खुद कहा कि मैं सिगरेट छोड़ना चाहता हूं, पहले दो हफ्ते उनकी काउंसलिंग की गई। इसके बाद दवा शुरू हुई और डॉक्टर के कहे मुताबिक सिगरेट पीने की आदत में बदलाव करने से एक साल के अंदर उनकी सिगरेट की लत पूरी तरह खत्म हो गई है।
केस-2
बांग्ला गांव निवासी लकी की उम्र 38 साल है। लकी ने बताया कि वह पिछले आठ साल से सिगरेट व पान मसाला के शोक में पड़ गए। इससे उन्हें खाना खाने में परेशानी होने लगी और मुंह छिला छिला रहने लगा। समस्या बढ़ती देखा उन्होंने जिला अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया तो तंबाकू नियंत्रण प्रोग्राम की जानकारी मिली। काउंसलिंग और दवाओं के बाद सात महीने में लकी की सिगरेट और पान मसाला खाने की आदत खत्म हो गई है।
कैसे करते हैं इलाज
तंबाकू नियंत्रण प्रोग्राम के नोडल डॉक्टर प्रशांत तोमर बताते हैं कि हम सिगरेट और तंबाकू छुड़ाने के लिए व्यक्ति को आर्थिक, स्वास्थ्य संबंधी व परिवार को होने वाले नुकसान के बारे में बता कर जागरुक करते हैं। इनमें से जिस विषय पर वह ज्यादा संवेदनशील होता है उसे लेकर ही काउंसलिंग की जाती है। इसके बाद धीरे-धीरे सिगरेट को कम करने के लिए कहा जाता है। इस बीच दवा भी शुरू हो जाती है, थोड़ी मात्रा में निकोटिन होने के कारण सिगरेट की तलब नहीं लगती। यदि कोई व्यक्ति हर घंटे में एक सिगरेट पीता है तो उसे यह अंतराल बढ़ाकर डेढ़ से दो घंटे करने के लिए कहा जाता है। इस तरह धीरे-धीरे आदत में परिवर्तन और दावों के प्रयोग से व्यक्ति सिगरेट या तंबाकू की लत से दूर हो जाता है।
वर्जन
हमारे पास अभी ऐसे 25 लोग इलाज करा रहे हैं, जोकि सिगरेट बीड़ी या पान मसाला छोड़ना चाहते हैं। इसमें युवा, बुजुर्गों से लेकर महिलाएं भी शामिल हैं। तंबाकू नियंत्रण प्रोग्राम के तहत अब तक 100 से ज्यादा लोगों का धूम्रपान या तंबाकू सेवन छुड़वाया जा चुका है।
- डॉ. प्रशांत तोमर