रायपुर खुर्द गांव के तालाब को मॉडल बनाने के लिए दोबारा से निर्माण कार्य शुरू होगा। उतने ही एरिया में काम कराया जाएगा जितनी जमीन तालाब की है। निजी जमीन पर कोई सौंदर्यीकरण कार्य नहीं होगा। इस जमीन से प्रशासन को कोई लेनादेना नहीं है। डीएम निधि गुप्ता वत्स ने इसके लिए ईओ डॉ. बृजेश सिंह को सख्त निर्देश दिए हैं। काम नहीं करने की स्थिति में ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट करने की नसीहत दी है।
रायपुर खुर्द ग्राम पंचायत के अंतर्गत आती थी, लेकिन परिसीमन के बाद ग्राम पंचायत नगरपालिका में शामिल हो गई। अधिकारियों की मानें तो यह तालाब कभी झील हुआ करती थी। जो कागजों में अब भी तालाब की जगह झील दर्ज है। प्रशासन की ओर से अभी इस तालाब को विकसित करने पर पूरा ध्यान है। नगर पालिका की ओर से इस तालाब को मॉडल के रूप में विकसित कराए जाने की योजना है। यही नहीं यह तालाब अमरोहा ही नहीं पूरे मंडल में मिसाल बनेगा।
तालाब का गंदा पानी निकालने के साथ-साथ इसकी सिल्ट भी निकाली गई। यहां चहारदीवारी कराने के साथ-साथ चारों ओर रंग-बिरंगी लाइटें लगाई जाएंगी। तालाब के पानी का ट्रीटमेंट कराया जाएगा। चारों ओर पौधरोपण कराने के लोगों के बैठने के लिए बर्थ बनाई जाएगी। आकर्षण के लिए स्टीमर की भी व्यवस्था कराई जाएगी। नगर पालिका ने तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए काम भी शुरू कर दिया था।तालाब को मॉडल के रूप में विकसित करने 1.6 करोड़ रुपये का बजट भी पास हुआ। जिसके बाद जीर्णोद्धार के लिए तालाब की खोदाई भी हो चुकी है।
इस बीच रायपुर खुर्द गांव के ही रहने वाले कामिल अली ने कोर्ट की शरण ली थी। इसके बाद 9 सितंबर को अधिकारियों के निर्देश पर नगर पालिका के निर्माण अनुभाग के वर्क एजेंट आलोक कुमार तालाब के कार्य की निगरानी करने पहुंचे थे। तभी बड़ी संख्या में लोगों ने उनका घेराव कर लिया था। मजदूरों को काम करने से रोक दिया था। वर्क एजेंट आलोक कुमार और मजदूरों से गाली-गलौज की गई। जान से मारने की धमकी दी गई। सरकारी काम में बाधा पहुंचाई। जाति सूचक शब्द कहकर अपमानित किया था। इस मामले में पुलिस ने ग्रामीणों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। तभी तो तालाब का निर्माण कार्य बंद पड़ा था। ईओ डॉ. बृजेश सिंह ने बताया कि डीएम के निर्देश पर रायपुर खुर्द के तालाब का काम दोबारा से शुरू कराया जाएगा। इस संबंध में संबंधित ठेकेदार को भी अवगत करा दिया गया है।