अक्तूबर 2011 में शहर में शुरू हुआ सीवर पाइप लाइन का काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। जबकि शुरुआती चरण में ये प्रोजेक्ट 18 महीने में पूरा होना था। लेकिन निर्धारित लक्ष्य के चार साल बाद भी काम अधूरा पड़ा है।
इसके चलते लोग दुश्वारियां झेल रहे हैं। करीब चालीस किमी पाइप लाइन का काम अभी भी बचा हुआ है। जिसे इस साल अक्तूबर तक पूरा करना है। वर्ष 2011 अक्तूबर में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के तहत शहर में सीवर पाइप लाइन डालने का काम शुरू किया गया।
इसका मकसद घरों से निकलने वाले शौचालय के गंदे पानी को सीवर पाइप लाइन के जरिए एसटीपी में फिल्टर कर रामगंगा नदी में छोड़ना है। ताकि लोगों को गंदगी और बदबू से छुटकारा दिलाया जा सके। साथ ही रामगंगा को मैली होने से बचाया जा सके।
244 करोड़ के इस प्रोजेक्ट को डेढ़ साल पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। शहर 264 किमी पाइप लाइन बिछाई जानी हैै। लेकिन डेड लाइन के चार साल बाद भी काम पूरा नहीं हो सका है। अभी भी चालीस किमी सीवर लाइन नहीं डाली जा सकी है।
काम लंबा होने से लोगाें की परेशानियाें की फेहरिस्त भी लंबी होती चली गई। जल निगम के एक्सईएन महेंद्र सिंह ने बताया कि प्रोजेक्ट में देरी की कई वजह रहीं। चालीस किमी का काम बचा है। इसमें 18 किमी का काम रेलवे से जुड़ा है। इस साल हर हाल में अक्तूबर तक काम पूरा कर लिया जाएगा।