मुरादाबाद। अरबों के घोटाले के आरोपों से घिरी मायानगर सहकारी समिति की जमीनों का रिकाॅर्ड एसआईटी को मिल चुका है। इस मामले में लेखपालों को जमीन के पुराने रिकार्ड नहीं मिल रहे हैं। इस मामले में एसआईटी के प्रमुख अधिकारी एडीएम प्रशासन का तबादला हो गया है। एसआईटी ने मायानगर सहकारी आवास समिति की जमीनों का ऑडिट करने के लिए सचिव से रिकार्ड मांगा था। सचिव से रिकार्ड नहीं मिलने पर आवास विकास के अधिकारियों ने समिति की जमीनों का रिकार्ड सौंप दिया। इस मामले में एडीएम प्रशासन गुलाब चंद्र और एसडीएम सदर डॉ. राम मोहन मीणा की देखरेख में लेखपालों ने जमीन के रिकार्ड खंगाले। दो लेखपालों ने बताया कि जमीनों के पुराने रिकार्ड नहीं मिले है। इस मामले में जांच टीम ने लेखपालों को रिकार्ड खंगालने के लिए अन्य विकल्पों के बारे में बताया है। मंगलवार को रिकार्ड खंगालते समय तहसील सदर के लेखपालों के पसीने छूट गए। पता चला कि इस मामले में समिति के पदाधिकारियों ने सदस्यों को बदलकर जमीनों का फर्जीवाड़ा किया है।
एसआईटी दूसरे चरण में जमीन की खरीद-बिक्री का रिकार्ड खंगालेगी। अभी समिति की जमीनों का सत्यापन रिकार्ड के माध्यम से किया जा रहा है। डीएम ने प्रदेश के अपर आयुक्त आवास की पहल पर मायानगर सहकारी आवास समिति की जमीनों के सर्वे के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। एसआईटी समिति के नक्शे के हिसाब से दिल्ली रोड स्थित बुद्धि विहार से लेकर लाकड़ी फाजलपुर तक की जमीनों का इतिहास खंगाल रही है। पता लगाया जाएगा कि जमीन किस आधार पर बेची गई। जमीनों के असली वारिस कौन-कौन थे। इस मामले में आवंटियों से भी पूछताछ की जाएगी। इस मामले में एसआईटी के सदस्यों की शीघ्र ही बैठक होने वाली है।