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पैसेंजर ट्रेनों की कमी से थम जाएगा ग्रामीण जनजीवन 

Fri, 29 Jul 2016 11:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
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ट्रेन - फोटो : demo
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 पैसेेंजर ट्रेनों के कैंसिलेशन ने यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी हैं। रेलवे ने ड्राइवराें की कमी के चलते मुरादाबाद मंडल ने पैसेंजर ट्रेनों को 21 कैंसिल कर दिया है। इनमें से 16 गाड़ियाें को 27 जुलाई से और पांच गाड़ियों को तीस जुलाई से कैंसिल किया जाएगा। इसके अलावा आधा दर्जन गाड़ियां पहले से ही कैंसिल और आंशिक रूप से कैंसिल चल रही हैं। गाड़ियों के कैंसिल होने से डेली पैसेंजर्स के अलावा ग्रामीण क्षेत्र से प्रतिदिन शहर आने वाले लोगों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है। 
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 मुरादाबाद मंडल में स्वीकृत पदों के सापेक्ष तीन सौ से अधिक ड्राइवरों की कमी है। जबकि नियमित ट्रेनों के साथ ही मालगाड़ियों का संचालन करना होता है। ट्रेनों के लेट होने से ड्राइवरों पर वर्क लोड ओवर हो जाता है। ऐसे में ट्रेनों का संचालन मुश्किल हो गया है। वहीं पैसेंजर गाड़ियों में घटती टिकट बिक्री ने भी रेलवे को कड़े फैसले लेने पर मजबूर कर दिया।

इसके लिए पहले ब्रांच लाइनों पर टिकट चेकिंग अभियान चलाया गया, लेकिन उससे भी टिकट बिक्री नहीं बढ़ी। नतीजा से रहा कि पैसेंजर गाड़ियों को कैंसिल करने का फैसला लिया गया। मंडल की कुल 21 गाड़ियों को कैंसिल किया गया है। इसमें कुछ ट्रेनें ऐसी है जो पहले सप्ताह में एक दो दिन के लिए रद्द थी, लेकिन अब उन्हें भी पूरी तरह से रद्द कर दिया है। 
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मुरादाबाद से गुजरने वाली रद्द हुई ट्रेनें 
- मुरदाबाद गजरौला नजीबाबाद मुरादाबाद (54395-96)
- चंदौसी ऋषिकेश पैसेंजर (54463-64)
- मुरादाबाद सीतापुर सिटी डेमू (74304-03)
- लखनऊ सहारनपुर पैसेंजर (54251-52)
- मुरादाबाद आनंद विहार मेमू (64553-54)
- सीतापुर सिटी दिल्ली सीतापुर सिटी (54075-76) मुरादाबाद सीतापुर सिटी के बीच रद्द तीस जुलाई से 

मंडल की अन्य रद्द होने वाली ट्रेनें 
- बरेली अलीगढ़ बरेली 
- खुर्जा मेरठ सिटी 
- बालामऊ शाहजहांपुर बालामऊ 
- शाहजहांपुर सीतापुर सिटी पैसेंजर (54327-28)
- सीतापुर सिटी शाहजहांपुर 
- सीतापुर बालामऊ 
- इलाहाबाद बरेली
- गजरौला नजीबाबाद गजरौला 
- बालामऊ लखनऊ 


रेलवे को भी होगी परेशानी 
 पैसेंजर ट्रेनों के कैंसिल होने से रेलवे के सामने भी परेशानी खड़ी हो गई है। इन्हीं ट्रेनों के प्रतिदिन टिकट बिक्री से होने वाली आय के कैश को मुरादाबाद लाया जाता है। इसके लिए लेदर के थैले और लोहे की तिजोरियों की भेजी जाती है। जो सिस्टम अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा है। इसमें बदलाव नहीं हुआ। लेकिन पैसेंजर गाड़ियां रद्द होने से कैश लाने के लिए नई व्यवस्था करनी पड़ेगी। इसके लिए दिन भी माथापच्ची चलती रही। 
 
रेलवे में स्टेशनों पर टिकट बिक्री से आने वाले कैश को चमड़े कै थैले में रखकर सील कर दिया जाता है। उस थैले को लोहे लोहे के बक्सों से या सीधे ही इन वहां से होकर मंडल मुख्यालय के लिए जाने वाली गाड़ियों से भेजा जाता है। इसके लिए कोई और व्यवस्था नहीं है। लेकिन अब मंडल की लगभग सभी पैसेंजर ट्रेनें रद्द हो चुकी हैं। जिन स्टेशनों पर पैसेंजर गाड़ियां रुकती हैं उनमें दो तिहाई स्टेशन ऐसे हैं जो सड़क मार्गों से सीधे सीधे नही जुड़े हैं।

दूसरा इन पर एक्सप्रेस गाड़ियों का ठहराव भी नहीं है। ऐसे में प्रति आने वाले कैश को मुरादाबाद तक लाना रेलवे के लिए ही समस्या बन गया है। वाणिज्य विभाग में इस बात पर ही मंथन चल रहा है कि इस कैश को किस प्रकार से मुख्यालय तक लाया जाएगा। अगर इसे बस या अन्य वाहनों के माध्यम से लाया जाता है तो उसके लिए भी अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी। 
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