कांठ। श्रीराम वन को गए तो पिता राजा दशरथ ने पुत्र वियोग में अपने प्राण त्याग किए। रामलीला में दशरथ मरण का मंचन देख दर्शकों की आंखें भी भर आई। रामलीला रंगमंच पर कलाकारों ने सुमंत विलाप, दशरथ मरण और भरत आगमन का सुंदर मंचन किया गया।
प्रशासन की ओर से गठित श्री रामलीला मंचन अस्थायी समिति के तत्वावधान में कांठ नगर में चल रहे रामलीला के 117वें मंचन में मंगलवार को श्री भोले बाबा आदर्श रामलीला-रासलीला नाटक कला मंडल चंदौसी के कलाकारों ने रंगमंच पर दिखाया कि पुत्र राम को 14 वर्षों का वनवास देने के बाद मंत्री सुमंत से श्रीराम, लक्ष्मण और सीता को कुछ समय ही वनों में बिताने के बाद वापस लाने को कहकर अयोध्या नरेश राजा दशरथ पुत्र वियोग में अर्धमूर्छित हो जाते हैं। इधर मंत्री सुमंत ने जब श्रीराम से अयोध्या लौटने को कहा तो राम ने पिता का आज्ञा का पालन करने की बात कहकर मंत्री को वापस राजमहल भेज दिया। जब अर्धमूर्छित हाल में पड़े राजा दशरथ ने मंत्री सुमंत से राम, लक्ष्मण और सीता कहां हैं के बारे में मालूम किया तो मंत्री ने उनके वन से न आने की बात बताई। जिसके बाद राजा दशरथ को श्रवण कुमार के माता-पिता द्वारा दिया गया श्राप याद आया और उन्होंने पुत्र वियोग में प्राण अपने त्याग दिए। राजा के निधन से अयोध्या नगरी भी शोक में डूब जाती है। इसके बाद भरत अयोध्या पहुंचते हैं। मंचन की व्यवस्था में समिति के कार्यकारी अध्यक्ष धीरज कुमार बिश्नोई, निर्देशक सुधीर कुमार बिश्नोई, कोषाध्यक्ष नवनीत पहलवान, पिंटू बिश्नोई, राकेश बिश्नोई, विनोद लम्बरदार, विजय चौहान सीटू, अंकित शर्मा, त्रिवेद कुमार, इंद्रजीत सिंह बिश्नोई, सुशील लम्बरदार, प्रदीप बिश्नोई आदि रहे।