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Moradabad News: मुरादाबाद मंडल में बिगड़ा मौसम, बारिश के साथ ओले भी गिरे

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मुरादाबाद। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मंगलवार को मौसम में फिर बदलाव आया। पूरे मुरादाबाद मंडल में दोपहर से ही शुरू हुई तेज बारिश के साथ ओले भी गिरे। अमरोहा, संभल के अलावा मुरादाबाद के कुंदरकी में ओलावृष्टि ने किसानों के माथे की चिंता बढ़ा दी है। इतना ही नहीं, जनवरी माह में हुई बारिश ने पिछले पांच साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। मंगलवार को जिले में दस घंटे में 32.4 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि इस जनवरी माह में अब तक 84 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। जो इस महीने में पिछले पांच साल में हुई सर्वाधिक बारिश है।
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मौसम विभाग का कहना है कि 24 घंटे मौसम खराब रहेगा। आंधी-तूफान और बिजली गिरने की संभावना है। 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। सोमवार को मौसम खुला हुआ था और तेज धूप थी लेकिन मंगलवार को दिन चढ़ने के साथ ही मौसम बिगड़ता गया। दिन में करीब 10 बजे से ही काले बादलों ने आसमान में डेरा जमा लिया और तेज हवाएं चलने लगीं। दोपहर करीब 12 बजे से बारिश शुरू हो गई। बारिश का यह सिलसिला रात तक लगातार जारी रहा। कई जगहों पर ओलावृष्टि भी हुई। अमरोहा में बिजली की चमक व बादलों की गरज के बीच डिडौली, हसनपुर समेत कई इलाकों ओलावृष्टि हुई। रामपुर में भी सुबह धूप खिली मगर दिन में 11 बजे के बाद से बादलों की गरज चमक के साथ बारिश शुरू हो गई। संभल में कई जगह बारिश के साथ ही शाम को ओले गिरे। इसी तरह से मुरादाबाद शहर व देहात में भी दोपहर से रात तक रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी रहा। कुंदरकी में तो शाम को ओले भी गिरे। बारिश और ओलावृष्टि से मौसम और ठंडा हो गया है।


मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के कारण अगले दो दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में 2-5 डिग्री तक की गिरावट आने की संभावना है। साथ ही यह खराब मौसम एक-दो दिनों तक बने रहने की संभावना है। इसी तरह से बारिश व तेज हवाओं का सिलसिला बना रहेगा।
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ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान



बेमौसम हुई बरसात और ओलावृष्टि के कारण सरसों, मटर व अन्य दलहनी फसलों को नुकसान पहुंचा है। इसी के साथ आलू व फूलगोभी की फसलों को भी नुकसान होने का अनुमान है।


गेहूं और गन्ने के लिए बारिश वरदान

मुरादाबाद। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह बारिश गेहूं, गन्ना और सब्जियों के लिए भी वरदान है। रबी फसलों जैसे गेहूं, सरसों और चने के लिए बेहद फायदेमंद है। बस इस बात का ध्यान रखना होगा कि खेतों में जलभराव न हो।
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