भीषण गर्मी की मार झेल रहे शहरवासियों को एक-दो दिन में इससे राहत मिलने के आसार हैं। मौसम विभाग ने बादल छाने और बूंदाबांदी होने की संभावना व्यक्त की है। उनका कहना है कि मौसम में बदलाव आएगा और गर्मी से राहत मिलेगी। प्री मानसून 18 जून से आने का अनुमान व्यक्त किया है।
आंशिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के निदेशक जेपी गुप्ता का कहना है कि एक-दो दिन बाद मौसम बदलेगा, उससे भीषण गर्मी से राहत मिल जाएगी।
बादलों की आवाजाही शुरू होगी। स्थानीय प्रभाव भी रहेगा। इन दिनों दक्षिणी-पूर्वी हवाएं होंगी। उनमें इतनी गर्माहट नहीं होगी। इसके अलावा कहीं-कहीं हल्की बारिश भी हो सकती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मानसून 20 जून के बाद ही आएगा। मुरादाबाद में करीब 11 सौ मिलीमीटर बारिश होती है। उस हिसाब से सामान्य बारिश होगी।
पंत नगर विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि अभी उत्तर-पश्चिमी हवाएं चल रही हैं। इससे वातावरण में नमी खत्म हो गई है। इसकी वजह से इतनी ज्यादा गर्मी हो रही है। बुधवार से खाड़ी की तरफ से दक्षिण पूर्वी हवाएं होंगी। इससे बूंदाबांदी के आसार हैं। आगामी चार दिन तक बादल और हल्की बारिश हो सकती है।
दो मिली मीटर बारिश का अनुमान है। इस स्थिति में कहीं बारिश होती भी है और कई बार सिर्फ बादल आकर ही रह जाते हैं। प्री मानसून का प्रभाव 18 जून से शुरू हो सकता है। अभी बंगाल की खाड़ी में जो चक्रवात बन रहा है, उससे मानसून की उत्तर भारत की तरफ बढ़ने की गति तेज हो जाएगी। राजकीय इंटर कालेज स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के डाटा रीडर निसार अहमद अंसारी ने बताया कि अधिकतम तापमान 38.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। तेज धूप की वजह से वातावरण में नमी कम हो गई है। सुबह के समय वातावरण में आर्द्रता 64 फीसदी थी, जो शाम को घटकर 48 फीसदी रह गई।
दो गुना हो गया शहर का वायु प्रदूषण
अनलाक में आवागमन बढ़ने और फैक्टरियों में कार्य शुरु होने का असर पर्यावरण पर होने लगा है। 31 मई तक 73 दर्ज किया गया वायु गुणवत्ता सूचकांक मंगलवार को बढ़कर 142 एक्यूआई हो गया। इसमें भारी कणों का स्तर पीले रंग पर पहुंच गया। पीएम 2.5 तो कुछ समय के लिए लाल और नारंगी स्तर को भी छू गया। नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स के अनुसार पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर 326 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर, न्यूनतम 63 और औसत 142 दर्ज किया गया। पीएम 10 का स्तर अधिकतम 162, न्यूनतम 64 और औसत 98 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर रहा। नाइट्रोजन ऑक्साइड, नाइट्रोजन थायराड, सल्फरडाई ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर हरे रंग के आस-पास रहा।