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Moradabad News: इतना खराब रिजल्ट हमने नहीं देखा...300 कॉलेजों के प्रिंसिपलों ने उठाए सवाल

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मुरादाबाद। गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय द्वारा पिछले सप्ताह जारी किए गए स्नातक और परास्नातक के परिणाम को लेकर कॉलेज प्रबंधन से लेकर विद्यार्थियों तक में जबरदस्त रोष है। विद्यार्थी आंदोलित हैं। वहीं कालेजों के प्राचार्यों ने भी आवाज बुलंद कर दी है। बृहस्पतिवार को मेफेयर कॉलेज में हुई मंडल के सभी 372 कॉलेजों के प्राचार्यों की बैठक में भी यह मुद्दा गूंजा। इनमें से तीन सौ कॉलेजों के प्राचार्यों ने एक स्वर में कहा कि उन्होंने इतना खराब रिजल्ट कभी नहीं देखा। कई कॉलेजों का परिणाम दस फीसदी भी नहीं रहा है। जबकि 22 का रिजल्ट पूरी तरह शून्य है। प्राचार्यों ने कहा कि बहुत ज्यादा खराब परिणाम का असर अब नए सत्र के दाखिलों पर भी पड़ेगा।
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विश्वविद्यालय का परिणाम भले ही 52.5 फीसदी है लेकिन कई कॉलेजों का रिजल्ट शून्य है। इससे नाराज विश्वविद्यालय से संबद्ध कालेजों के प्रिंसिपल बृहस्पतिवार को पंडित नगला बाईपास पर स्थित मेफेयर कॉलेज में इकट्ठा हुए। यहां सभी ने 15 मई को जारी स्नातक और परास्नातक के प्रथम सेमेस्टर के रिजल्ट पर सवाल खड़े किए। इंपैक्ट कॉलेज रामपुर के डॉ. कौशल कुमार ने कहा कि कॉलेज में सीबीएसई से 12वीं की परीक्षा 80 फीसदी अंकों से उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों का बीएससी कृषि में दाखिला लिया था। इसके बावजूद कॉलेज का परिणाम 20 फीसदी रहा है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी चार चार विषयों में फेल हुए हैं। उन्होंने मूल्यांकन पर सवाल खड़े किए।
ऐसा ही परिणाम सुखदेई स्मारक महाविद्यालय, धामपुर डिग्री कॉलेज का रहा है। श्री किशन सिंह महाविद्यालय चोटीपुरा का परिणाम 18 फीसदी रहा है। ग्लोबल डिग्री कॉलज के शिक्षक ने कहा कि इतने खराब परिणाम का असर कॉलेजों में नए सत्र के लिए हो रही दाखिलों पर पड़ेगा। विद्यार्थी इस विश्वविद्यालय के कॉलेजों में दाखिला लेने के बजाय दूसरे स्थानों पर पढ़ने चले जाएंगे। इस दौरान कुलसचिव गिरीश कुमार द्विवेदी, जेएस हिंदू कॉलेज के प्राचार्य प्रो. वीर वीरेंद्र सिंह, चेयरमैन अबू बकर मंसूर, प्रो. सुधीर अरोरा आदि मौजूद रहे।
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प्रश्न ज्यादा और समय कम होने की शिकायत
एसएस डिग्री कॉलेज पंवासा के डॉ. विवेक शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय के प्रश्नपत्र में प्रश्नों की संख्या अधिक होती है, जबकि सवाल हल करने के लिए विद्यार्थियों को दो घंटे ही दिए जाते हैं। यह समय तीन घंटे होना चाहिए। इस पर कुलपति ने कहा कि विद्यार्थी सीमित शब्दों में अच्छे से उत्तर लिख सकते हैं। उन्होंने कहा कि कॉलेज समय कम पड़ने की शिकायत कर रहे हैं, जबकि उनके पास ऐसी सीसीटीवी रिकॉर्डिंग है कि डेढ़ घंटे में ही परीक्षा कक्ष में 50 फीसदी विद्यार्थी बचे थे।

इनसेट...
कार्यक्रम के संयोजक और प्राचार्य प्रो. छुट्टन खान ने कहा कि इस बार प्रयोगात्मक परीक्षा में बाह्य एवं आंतरिक परीक्षक विश्वविद्यालय ने अशासकीय कॉलेजों के शिक्षकों को बनाया था। अमरोहा के दो काॅलेजों में रसायन विज्ञान विषय की परीक्षा के लिए आए इन परीक्षकों ने 15-15 हजार रुपये लिए थे, जबकि मांग अधिक रुपयों की थी। इन्हीं परीक्षकों ने हमारे कॉलेज में भी रुपयों की मांग की थी। यही शिकायत चार कॉलेजों ने की है। इसके अलावा मुख्य परीक्षा के दौरान नियुक्त किए सचल दल का व्यवहार भी हमारे कॉलेज में आपत्तिजनक रहा। कुछ कॉलेजों में जाकर रुपये भी मांगे थे। इस पर कुलपति ने कार्यालय आकर शिकायत करने की बात कही।

इनसेट...
ठेके पर होती थी परीक्षा, हुआ हंगामा
एसएसडी कॉलेज नजीबाबाद के डॉ. संदीप शर्मा ने कहा कि निजी कॉलेजों की अप्रूव्ड फैकल्टी को आंतरिक और बाह्य परीक्षक के रूप में नियुक्त नहीं किया और उनसे फॉर्म 16 की मांग की गई। साथ ही उन्होंने कहा कि पहली बार नकलविहीन परीक्षा हुई हैं। इससे पहले खासकर बिजनौर में परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए ठेके दिए जाते थे। इस पर सभी प्राचार्यों ने एकजुट होकर कड़ा विरोध जताया। इसकी वजह से कुछ समय तक हंगामा होता रहा।

यह भी मांगें रहीं प्रमुख
- सौ छात्राओं पर परीक्षा का स्व केंद्र करने की मांग
- निजी कॉलेजों के शिक्षकों को आंतरिक परीक्षा के दौरान परीक्षक नियुक्त करना
- चुनौती मूल्यांकन और बैक परीक्षा की फीस कम करना
- फेल हुए विद्यार्थियों को दस-दस बोनस अंक दिया जाना
- स्थायी संबद्धता की फीस रुहेलखंड विश्वविद्यालय से वापस लेना
- सचल दल में अशासकीय कॉलेज के शिक्षकों के साथ निजी कॉलेज का एक शिक्षक रखना

वर्जन...
कॉलेजों में विद्यार्थियों को यूजीसी के मानक के अनुरूप सुविधाएं मिलनी चाहिए। जहां परिणाम खराब रहा है, वहां पर संकायवार कॉलेज अन्य कॉलेजों की सूची बनाकर हमें उपलब्ध करवा दें। उन कॉलेजों की हम पांच फीसदी उत्तर पुस्तिकाएं निकालेंगे। उन कॉपियों का नि:शुल्क मूल्यांकन करवाया जाएगा। 20 फीसदी से कम बदलाव पर परिणाम नहीं बदला जाएगा। यदि 20 फीसदी से अधिक बदलाव हुआ तो पुर्नमूल्यांकन करवाया जाएगा। चुनौती मूल्यांकन में विद्यार्थियों पर ज्यादा आर्थिक भार न पड़े, इसके लिए फीस कम करने पर मंथन किया जा रहा है।
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प्रो. सचिन माहेश्वरी, कुलपति, गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय
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