मौका था प्रदर्शनी अनुगूंज में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंख्ला में आयोजित जल एवं पर्यावरण संध्या का। जिगर मंच पर आयोजित कार्यक्रम में परिवर्तन दी चेंज एनजीओ के स्वयं सेवकों ने प्लास्टबोट बनाम पृथ्वी नाटक का सुंदर मंचन किया। सिंगल यूज प्लास्टिक व प्लास्टिक की बोतलों से बने राक्षस प्लास्टबोट ने पृथ्वी पर ग्लोबल वार्मिंग का कारण खुद को बताया। पृथ्वी की वेशभूषा में मंच से कलाकार ने लोगों से अपने भविष्य को बचाने की अपील की। जब सबने मिलकर कहा कि हम प्लास्टिक का उपयोग नहीं करेंगे तो प्लास्टबोट भाग गया।
इसके बाद आकांक्षा विद्यापीठ इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों ने वन नहीं तो हम नहीं नाटक का मंचन किया। इसमें दिखाया गया कि एक बड़ी कंपनी के ठेकेदार द्वारा वन को काटने पर जीन जंतु बेघर हो गए। उन्होंने राजा शेर की अध्यक्षता में सभा आयोजित की और ठेकेदार को ही अपना शिकार बनाने का संकल्प लिया। वन्य प्राणियों ने जब ठेकेदार को पकड़कर राजा शेर के हवाले किया तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने वन्य जीवों से माफी मांगी और दोबारा उन्हें हरा भरा जंगल देने का वादा किया। इस तरह विभिन्न प्रस्तुतियों के जरिये लोगों को पर्यावरण की रक्षा करने का संदेश दिया गया। प्रदर्शनी में अतिथि को रोजाना प्लास्टिक की बोतलों में पानी दिया जाता है। बुधवार को जागरूकता कार्यक्रम होने के कारण प्लास्टिक की बोतलें भी नहीं दिखीं।
इस मौके पर मुख्य अतिथि यूपीएससी की परीक्षा में सफलता पाने वाले वैभव आनंद शर्मा, उनके पिता डॉ. आनंद प्रकाश शर्मा, सतीश शर्मा, केके गुप्ता, सीएल गुप्ता नेत्र संस्थान की चेयरपर्सन डॉ. आशी खुराना, डॉ. मुकेश अग्रवाल, डॉ. अनुराग अग्रवाल, डॉ. मनोज अग्रवाल, अतुल जौहरी, संजीव आकांक्षी, डॉ. मनोज रस्तोगी, डॉ. अजय अनुपम, कपिल कुमार, प्रिंस चौहान आदि मौजूद रहे। नाट्य प्रस्तुतियां देने वाली संस्थाओं व विद्यालयों को सम्मानित किया गया।