रामपुर। सुप्रीम कोर्ट के रुख से दो साल दो माह और 23 दिन बाद समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता आजम खां की रिहाई का रास्ता खुला है। तमाम मुकदमों में घिरने के बाद आजम खां ने पत्नी डॉ. तजीन फात्मा, अब्दुल्ला आजम सहित 26 फरवरी 2020 को कोर्ट में सरेंडर किया था। इसके बाद आजम खां को जेल भेजा गया था। 27 फरवरी की भोर में ही रामपुर जेल से तीनों को सीतापुर जेल भेज दिया गया था।
सपा नेता आजम खां के खिलाफ जिले के अलग-अलग थानों में 88 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से शत्रु संपत्ति के मामले को छोड़कर सभी मामलों में पहले ही आजम खां को जमानत मिल चुकी थी, इसके बाद शत्रु संपत्ति के मामले में भी पिछले सप्ताह हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई। इस बीच रामपुर पब्लिक स्कूल की एनओसी में फर्जीवाड़े के संबंध में दर्ज एक मामले में आजम खां का नाम शामिल किया गया जिसके बाद उनके खिलाफ दर्ज कुल मुकदमों की संख्या 89 हो गई।
इस पर आजम खां ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से रामपुर पब्लिक स्कूल संबंधी मामले में अंतरिम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को आजम खां को इस मामले में भी अंतरिम जमानत मंजूर कर दी। इसके बाद आजम खां को सभी मामलों में जमानत मिल चुकी है। इसके बाद अब वो कभी भी सीतापुर जेल से बाहर आ सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट से आजम खां को जमानत मिलने के बाद उनके समर्थकों में खुशी की लहर है।
बता दें कि जिस वक्त आजम खां को जेल भेजा गया था तब वह रामपुर से सपा सांसद थे। डॉ. तजीन फात्मा रामपुर नगर सीट से सपा विधायक थीं। सीतापुर जेल में रहते हुए ही आजम खां ने रामपुर नगर सीट से सपा उम्मीदवार के रूप में हालिया विधानसभा चुनाव लड़ा था। इस सीट पर उन्हें जीत हासिल हुई। उनके बेटे अब्दुल्ला आजम स्वार सीट से सपा विधायक निर्वाचित हुए हैं। विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद आजम खां ने सांसद के पद से त्यागपत्र दे दिया था।