रामपुर। सपा नेता आजम खां के खिलाफ दर्ज रामपुर पब्लिक स्कूल की एनओसी के फर्जीवाड़े के मामले में शहर कोतवाली पुलिस ने कोर्ट में प्रार्थनापत्र दाखिल कर आजम खां की कस्टडी रिमांड की मांग की थी। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने विवेचक द्वारा प्रस्तुत प्रार्थनापत्र को खारिज कर दिया है।
साल 2019 में शहर कोतवाली में तत्कालीन नगर शिक्षाधिकारी प्रेम सिंह राणा ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें आरोप था कि रामपुर पब्लिक स्कूल की मान्यता के लिए ली गई एक एनओसी पर तीन विद्यालयों का संचालन किया जा रहा था। पुलिस ने इस मामले में विवेचना करते हुए सपा नेता आजम खां की पत्नी डॉ. तजीन फात्मा और बीएसए दफ्तर के एक बाबू तौफीक अहमद के नाम शामिल करते हुए उन्हें आरोपी बनाया था।
पुलिस ने कुछ दिन पूर्व ही इस मामले में सपा नेता एवं जौहर ट्रस्ट के अध्यक्ष आजम खां को भी आरोपी बनाया था। इसके बाद कोर्ट ने छह मई को इस मामले में आजम खां के खिलाफ कस्टडी वारंट बनाकर सीतापुर जेल भेज दिया था। इस मामले में 18 मई को विवेचक एवं शहर कोतवाली प्रभारी गजेंद्र पाल त्यागी ने आजम खां को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में प्रार्थनापत्र दाखिल किया, जिसमें कहा गया कि पुलिस को आजम खां के कब्जे से फर्जी मुहर व लेटरहैड बरामद करने हैं। इसके लिए आजम खां की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर की जाए।
इस मामले में आजम खां के अधिवक्ता मोहम्मद जुबैर अहमद खां की ओर से आपत्ति दाखिल करते हुए तर्क दिया गया कि पुलिस ने कोर्ट को गुमराह करते हुए गलत तथ्यों के आधार पर प्रार्थनापत्र दिया है। इसे निरस्त किया जाए। उन्होंने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में आजम खां को अंतरिम जमानत दिए जाने का हवाला भी दिया। इसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद पुलिस द्वारा दाखिल कस्टडी रिमांड का प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया है।
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