रामगंगा में सोमवार को सुबह से ही जलस्तर घटने लगा। अपराह्न 3 बजे तक करीब एक फीट जलस्तर घट गया। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक जलस्तर रविवार की रात से घटने लगा था। पहाड़ों पर बारिश रुकने के बाद यह जलस्तर घटना बताया जा रहा है।
रामगंगा में 26 जून से पहाड़ों पर बारिश होने के कारण पहाड़ी नदियां खो, ढेला, सरहनियां का पानी लगातार बढ़ रहा था। बाढ़ खंड के मुताबिक प्रतिदिन 175 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा था। दो जुलाई तक यह पानी रामगंगा में पहुंचा। यही पानी दो जुलाई की रात से रामगंगा में बढ़ने लगा। रविवार को करीब डेढ़ मीटर पानी बढ़ने से रामगंगा उफनी हुई नजर आने लगी थी। हालांकि खतरा अभी बहुत दूर था। पहाड़ों पर बारिश थमने के बाद रामगंगा में नदियों का पानी आना बंद हो गया।
रविवार की रात से पानी घटने लगा। सोमवार को शाम करीब तीन बजे कें द्रीय जल आयोग की टीम ने कटघर में बनाए गए अपने गेज पर करीब एक फिट पानी कम रिकार्ड किया। रविवार को यहां 2.80 मीटर जलस्तर था। लेकिन सोमवार को यहां जलस्तर 2.55 मीटर पर था। इस तरह करीब एक फीट तक जलस्तर घटने से रामगंगा किनारे रहने वालों को कुछ राहत महसूस हुई है।
2010 की बाढ़ ने शहर को झकझोर दिया था
सितंबर 2010 में रामगंगा में आई बाढ़ ने पूरे मुरादाबाद शहर को झकझोर कर रख दिया था। रामगंगा में जलस्तर बढ़ने से इसीलिए शहर के लोगों में दहशत फैलने लगती है। सबसे ज्यादा रामगंगा विहार का पाश इलाका प्रभावित हुआ था। 2010 के बाद से बरसात के दिनों में रामगंगा में जलस्तर पर नजर रखना इसीलिए शहर के लोगों को जरूरी हो गया है।