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बुखार से तप रहा जिला, 2000 नए मरीज मिले

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मुरादाबाद। तमाम दावों के बाद भी सरकारी अमला जिले में डेंगू और वायर फीवर पर काबू पाने में नाकाम है। अधिकारी दूसरे जिलों से तुलना करके जिले के हालात बेशक बेहतर बता रहे हों लेकिन जिला अस्पताल की ओपीडी से लेकर निजी डाक्टरों के क्लीनिक तक लगी मरीजों की लाइनें हालात को बयां करने के लिए काफी हैं। अफसरों के बुखार पर नियंत्रण के दावों के बीच सोमवार को 20 और मरीजों का टेस्ट डेंगू पॉजिटिव निकला। इनमें मुरादाबाद शहर के 18 और अगवानपुर व रामपुर का एक - एक मरीज शामिल है। स्थिति यह है कि जिला अस्पताल की ओपीडी में बुखार से पीड़ित करीब 4500 मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं। इससे कई गुना संख्या शहर के निजी अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों की है।
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संचारी रोग नियंत्रण के नोडल अधिकारी डा.मिलिंद ने स्वीकार किया कि सोमवार को जो रिपोर्ट आई है उसमें 20 लोगों का डेंगू टेस्ट पॉजिटिव है। डा. मिलिंद के मुताबिक जिले में करीब 130 डेंगू पॉजिटिव पहले से चिन्हित किए जा चुके हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि डेंगू पीड़ितों की वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है क्योंकि सभी मरीजों की रिर्पोटिंग नहीं हो रही है। निजी अस्पतालों की ओर से भी सटीक जानकारी नहीं है। डा. मिलिंद ने बताया कि ठाकुद्वारा में लगे दो कैंपों में 359 मरीजों की जांच की गई जिनमें से 334 को बुखार था। लेकिन इनमें से किसी को डेंगू की पुष्टि नहीं हुई है। सोमवार को एक दिन की छुट्टी के बाद जिला अस्पताल की ओपीडी खुली तो वहां मरीजों की कतारें लग गईं। शहर के तमाम बड़े निजी अस्पतालों का कहना है कि उनके यहां भर्ती कुल मरीजों में से आधे से अधिक संख्या बुखार पीड़ितों की है। कमोबेश सभी अस्पतालों का कहना है कि उनके यहां और मरीजों को भर्ती करने के लिए अब बिस्तर नहीं बचे हैं।
जिले में बुखार से एक भी मौत नहीं: डा. मिलिंद
मुरादाबाद।
जिले में संचारी रोग नियंत्रण के नोडल अधिकारी / एसीएमओ डा. मिलिंद गर्ग का दावा है कि जिले में डेंगू या बुखार से अभी तक एक भी मौत नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि ठाकुरद्वारा में जिन तीन लोगों की मौत हुई उनमें से एक ब्लड प्रेशर का मरीज था, जो ब्रेन हेमरेज से मरा जबकि दूसरे की किडनी फेल थी। उनका दावा है कि मरने वाली तीसरी महिला साढ़े आठ माह की गर्भवती थी। उसकी ब्लड की रिपोर्ट में कुछ इंफेक्शन के संकेत थे। डा. मिलिंद का दावा है कि पाकबड़ा क्षेत्र में मरे लोग भी अलग - अलग बीमारियों से ग्रसित थे और उन सभी का पहले से इलाज चल रहा था।
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डेंगू का टेस्ट पॉजिटिव होने पर घबराएं नहीं: डा. राकेश
मुरादाबाद।
सीनियर फिजिशियन डा. राकेश कुमार कहते हैं कि बुखार के रोगियों की संख्या बढ़ी है। इनमें डेंगू के रोगियों की भी बड़ी तादाद है। लेकिन पिछले वर्षों की तुलना में बुखार की तीव्रता कम है। ज्यादातर मरीजों में प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन की जरूरत नहीं पड़ रही है। डेंगू का टेस्ट पॉजिटिव आने पर भी लोग घबराएं नहीं बल्कि इलाज शुरू कराएं। लीवर पर सूजन भी हो सकती है। एंटी बॉयोटिक का इस्तेमाल बिना डाक्टर की सलाह के हरगिज न करें। लिक्वड और फलों व हरी सब्जियों का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें। बेड रेस्ट लें, चार से पांच दिन में प्लेट्लेट़्स नार्मल होने लगेंगी। अपने आसपास पानी को इकट्ठा न होने दें ताकि डेंगू का मच्छर न पनप सके।
ढककर रखें बच्चों का पूरा शरीर: डा. शलभ
मुरादाबाद।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डा. शलभ अग्रवाल का कहना है कि पिछले वर्षों की तुलना में बच्चों में डेंगू और वायरल के मामलों में बड़ा इजाफा हुआ है। लेकिन अच्छी बात यह है कि गंभीर रोगियों की संख्या इस बार कम है। मरीजों को भर्ती करने की जरूरत भी नहीं पड़ रही है। चार से पांच दिन के ट्रीटमेंट में सुधार देखा जा रहा है। बच्चों के शरीर को ज्यादातर ढककर रखें, उन्हें पूरे कपड़े पहनाएं ताकि मच्छरों से बचाया जा सके। अपने आसपास गंदगी और पानी का ठहराव नहीं होने दें। हाथ - पैर में दर्द और उल्टियों के साथ सिर दर्द की शिकायत हो तो चिकित्सीय जांच कराकर इलाज शुरू कराएं।
पिछले एक महीने से अस्पताल बुखार के मरीजों से फुल है। इनमें 70 प्रतिशत टेस्ट डेंगू पॉजिटिव हैं जबकि 30 प्रतिशत वायरल हैं। मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हमारे पास अब और मरीजों को भर्ती करने की जगह नहीं बची है। पिछले कुछ सालों में डेंगू की यह अभी तक की सबसे भयावह स्थिति है। - केके मिश्रा, निदेशक, कोठीवाल डेंटल कालेज एंड रिसर्च सेंटर।
बुखार के रोगियों की संख्या में पिछले साल की तुलना में करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। सर्वाधिक बढ़ोत्तरी डेंगू के मरीजों में हुई है। मेडिकल कालेज में हर रोज बुखार पीड़ितों की बड़ी संख्या पहुंच रही है। इनमें ज्यादातर में डेंगू टेस्ट पॉजिटिव है। - विपिन जैन, निदेशक, हॉस्पिटल प्रशासन एंड प्लानिंग, टीएमयू।
अस्पताल में बुखार पीड़ितों की संख्या काफी है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की भी है जिनमें डेंगू का टेस्ट पॉजिटिव आया है। इलाज से मरीजों की प्लेटलेट्स काउंट्स ठीक हो रही हैं। उम्मीद है आने वाले आठ से दस दिनों में मौसम ठंडा होने के साथ ही डेंगू और वायर फीवर पर काबू पा लिया जाएगा। - डा. अंकुर गोयल, निदेशक, श्री साईं सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल।
अस्पताल में भर्ती कुल मरीजों में से 50 फीसदी से अधिक मरीज बुखार पीड़ित हैं। बुखार पीड़ित मरीजों में ज्यादातर की प्लेट्लेट्स कम हो रही हैं। हालांकि डेंगू की पुष्टि कम मरीजों में ही हो रही है। अच्छी बात यह है कि तीन से चार दिन के इलाज के बाद मरीजों में रिकवरी हो जा रही है। - डा. अनुराग अग्रवाल, एमडी, कॉसमॉस अस्पताल।
बाकी जिलों की तुलना में स्थिति बेहतर: डीएम
मुरादाबाद।
जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह का कहना है कि डेंगू और वायरल फीवर के मामले में मुरादाबाद प्रदेश में नवें स्थान पर है। उन्होंने कहा कि जिले की जनसंख्या 36 लाख है ऐसे में मरीजों की संख्या अधिक दिख रही है। डीएम का कहना है कि रोजाना बहुत सारी स्लाइड बन रही हैं लेकिन जांच में डेंगू की पुष्टि नहीं हो रही है। जिन गांवों में अधिक मरीज मिल रहे हैं वहां एंटी लार्वा का छिड़काव और फागिंग कराई जा रही है। बकौल डीएम स्थिति पिछले साल की तुलना में बेहतर है। पिछले साल 104 तक बुखार पहुंच रहा था इस बार इतना तेज बुखार के मामले बहुत कम हैं। उन्होंने कहा कि जिले में चले स्वच्छता अभियान का ही नतीजा है कि बुखार के रोगियों की संख्या कम है नहीं तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती थी।
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