मुरादाबाद। गांगन नदी में डूबे दोनों भाइयों के शव रविवार को नदी में ढूंढ निकाले गए। प्रशासन का एक तैराक और स्थानीय पुलिस की टीम के अलावा एसडीआरएफ की टीम भी तामझाम के साथ मौके पर पहुंची। टीम के जवान और तैराक गोते ही लगाते रह गए जबकि इस बीच मछली का शिकार करने वाले ग्रामीणोें ने नदी में कांटा और रस्सी डालकर दोनों भाइयों के शव ढूंढ निकाले। इसी डोर के सहारे शवों को फंसाकर बाहर निकाल दिया।
शनिवार को पैपटपुरा एकता कालोनी निवासी दो सगे भाई गौरव और शिवम मछली पकड़ने गांगन नदी में गए थे पर दोनों डूब गए थे। देर रात तक नदी में उन्हें ढूंढा गया पर कुछ पता नहीं चला। भोर होने के इंतजार में पूरे परिवार के लोगों की रात जगकर कटी। दोनों भाइयों के पिता रविंद्र शाह और उसके कई रिश्तेदार तड़के चार बजे ही नदी किनारे पहुंच गए थे। सुबह करीब साढ़े सात बजे एसडीआरएफ की टीम व प्रशासन के चिह्नित तैराक मौके पर पहुंचे। काफी देर तक वह लोग अपने पास मौजूद संसाधनों के सहारे व गोता लगाकर डूबे बच्चों को ढूंढ़ते रहे, लेकिन वह नहीं ढूंढ़ पाए।
काम आया चांद का कांटा
इस बीच मौके पर पड़ोसी गांव का व्यक्ति चांद खां भी यहां आ गया। वह मछली पकड़ने वाले वाले कांटे लगी लंबी डोर लेकर पहुंचा था। उसने गांव के लोगों से बच्चों के डूबने वाले स्थान के बारे में जानकारी ली और उसके बाद नदी किनारे खड़े होकर कांटे लगी डोर अंदर फेंक दी। थोड़ी देर तक यह मशक्कत चलती रही और कांटा उनके कपड़ों में जा फंसा। इसके बाद एक-एक कर दोनों शवों को खींच लिया गया। इस काम में ग्रामीणों ने मदद की।
एक का 17, दूसरे का पौने अठ्ठारह घंटे बाद मिला शव
मुरादाबाद। डूबने के करीब 17 घंटे बाद सुबह सवा आठ बजे और पहले छोटे भाई गौरव का शव पानी से बाहर निकाला जा सका। उसके करीब पौन घंटे बाद बड़े भाई शिवम का शव पानी से निकाला जा सका।
नहीं मिलेगी दैवी आपदा सहायता
मुरादाबाद। दो भाइयों की गांगन नदी में डूबने से हुई मौत के मामले में मृतकों के परिवार वालों को प्रशासन की ओर से किसी तरह की कोई सहायदा नहीं मिल सकेगी। एडीएम वित्त एवं राजस्व प्रीति जायसवाल ने बताया कि दैवी आपदा उस स्थिति में मृतक के परिवार वालों को दी जाती है जब बाढ़ आने के दौरान किसी की डूबने से मौत हो। दोनों भाई स्वयं नदी में मछली पकड़ने गए थे। इसलिए उनके परिवार को दैवी आपदा सहायता नहीं उपलब्ध कराई जा सकती।