केस-1
कांठ रोड निवासी निजी कंपनी के कर्मचारी का 11 साल का बेटा वीडियो गेम की लत के कारण झगड़ालू प्रवृत्ति का हो गया। वह अपने दोस्तों के साथ हर समय लड़ाई करता रहता है, स्कूल से उसकी शिकायतें आने लगीं तो माता-पिता ने वीडियो गेम बंद करा दिया। लेकिन वह वीडियो गेम खेलने की जिद करने लगा। बच्चे ने अपने हाथ की नस काटने की कोशिश की। उसका इलाज मानसिक रोग विशेषज्ञ से चल रहा है।
केस-2
सिविल लाइंस निवासी स्पेयर पार्ट्स कारोबारी का 12 साल का बेटा रात में माता-पिता से छिपकर मोबाइल में वीडियो गेम खेलता है। इसके कारण अक्सर दिन भर सोता रहता है। उसे स्कूल जाने में बहुत परेशानी होती है। वीडियो गेम की तरह घर में चीखने लगता है। परेशान होकर पिता ने उसे मानसिक रोग विशेषज्ञ को दिखाया। दो हफ्ते से बच्चे की लगातार काउंसिलिंग चल रही है। उसे दूसरे गेम खेलने की सलाह दी गई है।
सुपरहीरो की जीतने की आदत पसंद आने के कारण बच्चे ऐसा करते हैं। हाथ की नस काटने, भाई को हथौड़ा मारने, ऊंचाई से कूदने की कोशिश करने जैसे कई मामले आते हैं। इन बच्चों का इलाज व्यवहार चिकित्सा (विहेवियर थैरेपी) से किया जाता है। दवाओं की जरूरत नहीं है। मोबाइल की लत के कारण ये मामले बढ़े हैं। - डॉ. नीरज गुप्ता, मनोरोग विशेषज्ञ
अगर आपका बच्चा लगातार सुपर हीरो जैसा बनने की बात करता है। दूसरों को चोट पहुंचाता है और इससे उसकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है तो इसे नजरअंदाज न करें। इसे गंभीरता से लें। बच्चों की काउंसिलिंग करें। यदि बच्चा आपकी बात नहीं मानता तो मनोरोग विशेषज्ञ के पास ले जाएं। - डॉ. अनंत राणा, मनोरोग विशेषज्ञ
डॉक्टरों की सलाह
- बच्चे को मोबाइल व वीडियो गेम का सीमित प्रयोग करने दें
- नजर रखें कि आपका बच्चा कौन सा गेम खेलता है
- कार्टून, फिल्म या गेम से उसकी पढ़ाई या व्यवहार प्रभावित हुआ है तो गंभीरता से लें
- बच्चे पर अचानक प्रतिबंध न लगाएं उस समझाने की कोशिश करें
- सकारात्मक किरदारों वाले वीडियो गेम खिला सकते हैं
- धीरे-धीरे गेम की लत खत्म कराएं और बाहर खेलने को कहें