बताया कि इस दौरान उनके पिता बनवारी लाल गोयल अपने रसोइया समेत कई लोगों के साथ फैक्टरी की दूसरी मंजिल पर छिपे हुए थे। लेकिन, हिंसक भीड़ ने तलाशकर उनके पिता समेत कई लोगों की हत्या कर दी। उनका रसोइया हरिद्वार लाल गंभीर रूप से घायल हुआ था जबकि रसोइये के भाई ऋषि की भी हत्या कर दी गई। पहले हिंदुओं को निर्ममता के साथ काटा गया। इसके बाद टायर, मिट्टी का तेल और पेट्रोल डालकर जिंदा लोगों को जला दिया गया। जिसके बाद उन्होंने संभल छोड़ दिया और परिवार के साथ दिल्ली में जाकर बस गए थे।
हत्या कर रिपोर्ट दर्ज कराई पर नहीं पकड़े गए आरोपी, अब जगी उम्मीद
कारोबारी बनवारी लाल गोयल की हत्या के मामले में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। मामले में लंबे समय तक जांच चलती रही, लेकिन कोई आरोपी जेल नहीं गया। इस मुकदमे को विनीत कुमार गोयल के चचेरे भाई ओमप्रकाश गर्ग एडवोकेट ने लड़ा। लेकिन, 1993 में ओमप्रकाश गर्ग का भी निधन हो गया। खौफजदा गवाह भी अपनी गवाही देने नहीं पहुंचे। बृहपतिवार को खग्गू सराय मंदिर पर पूजा-अर्चना करने पहुंचे विनीत कुमार गोयल का कहना है कि उन्होंने डीएम और एसपी से मिलकर इंसाफ की गुहार लगाई है। आज भी उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा।
भीड़ को देखकर जान बचाकर भागना पड़ा
दंगे को बेहद करीब से देखने वाले रविंद्र गोयल वर्तमान में मुरादाबाद रहते हैं। उनका कहना है कि कारोबारी बनवारी लाल गोयल के पास ही उनकी आढ़त थी। जिस समय बनवारी लाल गोयल की हत्या कर उनकी फर्म में आग लगाई गई तब वह उनके पास में ही अपनी आढ़त पर थे। भीड़ को देखकर हमने अपने कर्मचारियों को घर भेज दिया। बाद में आढ़त को बिना बंद किए वहां से जान बचाकर भागना पड़ा। मृतक बनवारी लाल गोयल की भांजी नीमा गोयल बताती हैं कि जिस समय दंगा हुआ उस दौरान उनके पति रवि गोयल भी मामा बनवारी लाल गोयल के साथ थे। दोनों साथ छिपे हुए थे। भीड़ को अपनी तरफ आता देखकर रवि गोयल ने पुलिस चौकी की शौचालय में छिपकर जान बचाई थी।
बनवारी लाल गोयल नेक इंसान थे, हिंदू-मुस्लिम को एक नजर से देखते थे
नीमा गोयल बताती हैं कि उनके मामा बनवारी लाल गोयल बेहद नेक इंसान थे। वह हिंदू और मुस्लिम को एक नजर से देखते थे। उन्हें उम्मीद भी नहीं थी की कोई उनके साथ ऐसा करेगा। उन्हें लगता था कि शहर में अच्छी पहचान होने के कारण इस हिंसा में उनके साथ भी कुछ नहीं होगा। मगर, वह सब गलत थे। लेकिन, अचानक भीड़ और उन्हें आग में झोंक दिया। नीमा गोयल ने बताया कि अब मंदिर में दोबारा से पूजा पाठ शुरू हुई है तो ये हमारे और उन परिवारों के लिए गर्व की बात है, जो दंगे के दौरान शहर छोड़ कर चले गए थे।
तत्कालीन डीएम ने नहीं की कार्रवाई, फोर्स भी नहीं भेजी
संभल। विनीत कुमार गोयल ने बताया कि 1978 के दंगे के दौरान फरहत अली डीएम हुआ करते थे, जिन्होंने अपनी जिम्मेदारियां को कतई नहीं समझा। उन्होंने शहर में हो रहे दंगे को शांत कराने की कोशिश तक नहीं की। फोर्स भी नहीं भेजी। इसी वजह से दंगाइयों के हौंसले ओर बुलंद होते चले गए। अगर समय पर प्रशासन ने कोई कार्रवाई की होती तो इतना बढ़ा सांप्रदायिक दंगा कभी नहीं होता।
82 आरोपी बनाए गए थे, नौ हत्याओं का एफआईआर में किया गया था जिक्र
1978 दंगों में 82 आरोपी बनाए गए थे। इसमें 9 लोगों की हत्या को भी शामिल किया गया था। मुरादाबाद न्यायालय में मुकदमें की सुनवाई हुई थी। इसमें किसी का दोष साबित नहीं हुआ था और सभी निर्दोष साबित हो गए थे। अभी भी लोगों के दिमाग में यही सवाल है कि आखिर हत्या किसने की और दंगा कर शहर किसने जलाया। जब जो आरोपी बनाए गए थे वही निर्दोष साबित हो गए। पुलिस की कमजोर कार्रवाई को जिम्मेदार लोग बता रहे हैं। यदि उस समय पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सही सबूत पेश किए होते तो शायद उस समय जान गंवाने वाले और माल का नुकसान उठाने वाले लोगों को न्याय मिल सकता था।