जिला अस्पताल में मंगलवार को पुरुष नसबंदी दिवस मनाया गया। अस्पताल की ओपीडी के कमरा नंबर एक के बाहर बैनर लगाकर दिवस की खानापूर्ति पूरी कर ली गई। एक भी पुरुष नसबंदी नहीं हुए। वहीं पिछले साल पूरे वित्तीय वर्ष में सिर्फ दो पुरुष नसबंदी किए गए थे। जबकि परिवार कल्याण की योजनों के प्रचार-प्रसार पर हर साल करीब 18 लाख खर्च होतेे हैं।
परिवार के कल्याण में पुरुषों की भागीदारी लगातार कम हो रही है। जो स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय है।
इसके मद्देनजर शासन ने 21 मई को पुरुष नसबंदी दिवस मनाने का निर्णय लिया था। साथ ही हर महीने इसका आयोजन कर पुरुष नसबंदी की संख्या बढ़ाई जाए। अवकाश के चलते मंगलवार को पुरुष नसबंदी दिवस मनाया गया। शिविर के नाम पर जिला अस्पताल की ओपीडी के कमरा नंबर एक के बाहर एक बैनर लगा दिया गया।
न तो कोई पुरुष नसबंदी हुए और न ही कोई गोष्ठी। यही वजह है कि पिछले साल सिर्फ दो पुरुष नसबंदी हुए। जबकि आपको जानकर हैरानी होगी कि फैमिली प्लानिंग के सालभर का बजट करीब 73 लाख है। इसमें 18 लाख तो नसबंदी के प्रचार-प्रसार, शिविर, बैठकों पर खर्च किया जाता है। लेकिन प्रचार-प्रचार पर कितना धन खर्च होता होगा ये नसबंदी की संख्या खुद ब खुद बयां कर देती है।