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हर साल करोड़ों की दाल खा जाते वनरोज

Sun, 25 Oct 2015 01:50 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला मुरादाबाद
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प्रदेश में हर साल दलहनी फसलों का एक बड़ा रकबा चौपट हो जाता है। कहीं फसल बीमारियों की भेंट चढ़ जाती है तो कहीं वनरोज बर्बाद कर देते हैं। स्थिति यह है कि लगातार होने वाले नुकसान के कारण अब काश्तकार भी इन फसलों से पीछा छुड़ाने लगे हैं।
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यही वजह है कि सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी दलहनी फसलों का रकबा बढ़ नहीं पा रहा है। अगर देश भर की बात करें तो मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा और पंजाब में दलहनी फसलों की खेती की जाती है। देश भर में इन फसलों का रकबा तकरीबन 239 लाख हेक्टेयर है।

जबकि उत्तर प्रदेश में 23.9 लाख हेक्टेयर है जो पूरे देश का दस फीसदी है। इसमें खरीफ में 9 लाख 89 लाख हेक्टेयर है जबकि रबी में 14.6 लाख हेक्टेयर। अगर पिछले दस सालों की बात की जाए तो दलहनी फसलों का रकबा बढ़ नहीं पाया है। इसकी वजह किसानों का मोहभंग होना माना जाता है।
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उत्तर प्रदेश के अधिकांश जनपदों में उड़द, मूंग, मसूर, अरहर, चना और मटर की खेती होती थी। बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपदों में रकबा काफी थी। कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर जयप्रकाश चौधरी का कहना है कि दलहनी फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान वनरोज ने पहुंचाया है।


झुंड में निकलने वाले यह जंगली जानवर फसलों को बर्बाद कर देते हैं। अब हर वक्त तो किसान इन फसलों की रखवाली कर नहीं सकते लिहाजा नुकसान झेलते हैं। यही वजह है कि क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा संचालित की जाने वाली तमाम योजनाओं के बाद भी किसानों में दिलचस्पी पैदा नहीं हो रही।


किसानों ने गेहूं, धान और गन्ना में ही हाथ आजमाने शुरू कर दिए हैं। बताया जाता है कि पहले बुंदेलखंड में वनरोज नहीं थे। लेकिन अब वहां भी संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में वहां के किसानों को भी बड़ा नुकसान हर साल झेलना पड़ता है।

हालांकि वनरोज की कभी गणना तो नहीं होती लेकिन वन अफसरों का मानना है कि हर जिले में वनरोज की औसतन संख्या दो हजार के करीब है। मुरादाबाद मंडल के जनपदों में ही दस हजार के करीब इनकी संख्या है। संख्या में बड़ी तेजी के साथ इजाफा हो रहा है।
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प्रदेश के इन मंडलों में सबसे ज्यादा नुकसान : मुरादाबाद, मेरठ, बरेली, अलीगढ़, कानपुर, झांसी, चित्रकूट, आगरा, सहारनपुर
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