मानसिक रोगियों को भी नहीं मिल रही दवा
जिला अस्पताल में तीन दिन मानसिक रोगियों के लिए ओपीडी होती है। सोमवार को दवा लेने पहुंचीं, हरथला निवासी अनीता ने बताया कि पिछले दो माह से अस्पताल में दवा नहीं मिल रही है। सिर्फ नींद की गोली यहां मिल जाती है, बाकी डिप्रेशन के लिए अन्य दवाएं बाहर से लेनी पड़ती हैैं। अनीता ने बताया कि उन्हें एनजाइटी की समस्या है और छह माह से उनका इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है।
अस्पताल में एमआर कॉल के भी लग रहे आरोप
जिला अस्पताल में दीवार पर स्पष्ट लिखा है कि मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव का प्रवेश वर्जित है। सोमवार को स्टाफ में चर्चा थी कि कुछ डॉक्टर चोरी छिपे एमआर कॉल भी ले रहे हैं। अपने चेंबर में एक-दो घंटे बैठकर वह अस्पताल परिसर में किसी अन्य स्थान पर बैठ जाते हैं। वहां एमआर व उनके बीच वार्ता होती है।
इसके बाद मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं लिखने का सिलसिला चलता है। हालांकि इस बात की शिकायत किसी ने अस्पताल प्रशासन से नहीं की है। ऐसे डॉक्टर अस्पताल के उन चिकित्सकों की छवि खराब रहे हैं जो जरूरतमंद मरीजों की सीटी स्कैन आदि जांच का शुल्क अपने पास से अदा कर देते हैं।
जो दवाएं अस्पताल व जन औषधि केंद्र में उपलब्ध हैं, डॉक्टरों को वही लिखने के आदेश हैं। हम डॉक्टर से इसका जवाब लेंगे कि मरीजों को बाहर से दवाएं क्यों लिखी जा रही हैं। जरूरत पड़ने पर कार्रवाई भी की जाएगी। - डॉ. राजेंद्र कुमार, चिकित्साधीक्षक, जिला अस्पताल