बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे इस्लाम हैंडलूम कारखाने में काम करने गए थे। करीब साढ़े नौ बजे इस्लाम को फोन कर शाइस्ता ने जारा की तबीयत खराब होने के साथ सांस लेने में दिक्कत होने की बात कही जिसके बाद इस्लाम घर आए व बच्ची को लेकर निजी अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जारा को मृत घोषित कर दिया।
जारा के शरीर पर चोट के निशान थे। इस्लाम बेटी जारा के शव को छोटे भाई मोहम्मद मोबिन के घर लेकर पहुंचे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने जांच की। बच्ची की पिटाई से हत्या के शक में पुलिस उसकी सौतेली मां शाइस्ता को हिरासत में ले लिया था।
एसपी अमित कुमार आनंद ने कोतवाली पहुंचकर हत्यारोपी शाइस्ता में पूछताछ की थी। देर शाम डॉक्टरों के पैनल में बच्ची के शव का पोस्टमार्टम किया। जिसमें सामाने आया कि जारा की गला दबाकर हत्या की गई थी। इससे पहले उसकी लात-घूसों और डंडे से पिटाई की गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि के बाद बच्ची के पिता मोहम्मद इस्लाम की तहरीर पर हत्यारोपी शाइस्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। हिरासत में ली गई शाइस्ता को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया जहां से जेल भेज दिया गया है। पूछताछ के दौरान उसने खुद बच्ची की हत्या करना कबूल कर लिया है।- अमित कुमार आनंद, एसपी
बच्ची की हत्या की खबर से बदहवास हो गए असली माता-पिता
संतान पैदा नहीं होने पर इस्लाम व उसकी पत्नी सायरा ने नौगांवा सादात के पंजू सराय निवासी कय्यूम व उनकी पत्नी नईमा से जारा को गोद लिया था। उस समय जारा तीन दिन की थी। बच्ची के असली माता-पिता कय्यूम व नईमा ने स्टांप पर रजिस्टर तरीके से बच्ची को गोद दिया था।
सायरा की मौत के बाद इस्लाम ने संभल के सरायतरीन निवासी तलाकशुदा शाइस्ता से दूसरा निकाह कर लिया था। पुलिस के मुताबिक शाइस्ता बच्ची से सौतेला व्यवहार करती थी। घटना के समय बच्ची घर के बाहर खेल रही थी। इस दौरान उसके कपड़े गंदे हो गए थे।
बस इस बात पर शाइस्ता भड़क गई और उसने पहले बच्ची की बेरहमी से पिटाई की और फिर गला दबाकर हत्या कर दी। किसी को हत्या करने का शक न हो इसलिए शाइस्ता ने पति इस्लाम को फोन कर जारा की तबीयत खराब होने की बात बताई।
उसने बच्ची के सीढ़ी से गिरने की कहानी गढ़ी। शुरुआत से ही शाइस्ता पर बच्ची की हत्या करने का शक था लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि के बाद शक यकीन में बदल गया। बेटी की हत्या की खबर मिलने के बाद उसके असली पिता कय्यूम और नईमा भी बदहवास हो गए। दोनों बेटी को गोद देने के उस फैसले को कोसते रहे। छह माह के भीतर पहली पत्नी और गोद ली गई बेटी की मौत से इस्लाम भी टूट गया है।