संभल के खेतापुर अमरपुर स्थित चुअर खेड़ा मढ़ी में एक सुरंग मिली है। मढ़ी के महंत किशन गिरि महाराज का दावा है कि यह सुरंग संभल तक जाती है। बताया कि सुरंग पृथ्वीराज चौहान के सेनापति चौड़ा के आवागमन के लिए बनी थी। प्रशासन ने इसकी खोदाई कराने का आश्वासन दिया है।
संभल के गांव खेतापुर अमरपुर उर्फ धर्मपुर में स्थित चुअर खेड़ा मढ़ी से सुरंग संभल तक जाने का दावा मढ़ी के महंत किशन गिरि महाराज ने किया है। महंत का कहना है कि प्रशासन ने जल्द इस सुरंग की खोदाई कराने का आश्वासन दिया है। इसी क्रम में रविवार को सफाई भी कराई गई थी।
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प्राचीन सिद्ध पीठ आश्रम से भी लोग इस मढ़ी को पहचानते हैं। प्राचीन स्थल होने के चलते आसपास के गांवों के लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। महंत ने बताया कि पृथ्वीराज चौहान के शासनकाल में भी यह मढ़ी थी। इस मढ़ी पर उनके एक चौड़ा नामक सेनापति रहा करते थे।
जो इमली वाली देवी की पूजा करते थे। वह मंदिर अभी भी स्थित है। महंत ने बताया कि पूर्वजों ने बताया है कि पृथ्वीराज चौहान का किला संभल में था इसलिए मढ़ी से सुरंग संभल तक जाती थी। जिससे सेनापति का आना जाना रहता था।
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पृथ्वीराज चौहान के शासनकाल के बाद भी यह सुरंग खुली रही। अब पूरी तरह पट गई है। महंत ने बताया कि इसी वर्ष सुरंग की खोदाई कराई गई थी। करीब 100 मीटर तक खोदाई की गई थी लेकिन बाद में वह खोदाई बंद कर दी थी।
महंत का कहना है कि इस सुरंग की खोदाई कराई जाए तो संभल तक ही पार निकलेगी। इसलिए प्रशासन ने रविवार को इस मढ़ी की सफाई कराई है। साथ ही कहा है कि जल्द सुरंग की खोदाई कराई जाएगी। जिससे प्राचीन सुरंग का सच सामने आ सके और यह भी जानकारी स्पष्ट हो सके कि यह सुरंग कहां जाकर निकलती है।
महंत का दावा, मढ़ी पर रहते थे पृथ्वीराज चौहान के घोड़े
महंत ने बताया कि बुजुर्ग बताते थे कि इस मढ़ी पर ही पृथ्वीराज चौहान के घोड़े आराम करते थे। सुरंग के रास्ते ही वह संभल तक जाते थे। क्योंकि इस मढ़ी के आसपास अभी भी कोई गांव नहीं है। सदियों पहले तो दूर-दूर तक जंगल होता होगा। महंत का कहना है कि सुरंग की खोदाई से सारे तथ्य सामने आ जाएंगे। इसलिए इस सुरंग की खोदाई होनी जरूरी है।
चुअर खेड़ा की मड़ी की प्रशासन ने कराई सफाई
इइससे पहले चुअर खेड़ा मड़ी पर रविवार को चंदौसी तहसील की टीम ने सफाई करवाई। इस मड़ी को भी प्राचीन बताया जा रहा है। लोग प्राचीन सिद्ध पीठ आश्रम के नाम से इसको जानते हैं। बताया जा रहा है कि पृथ्वीराज चौहान के समय की यह मड़ी है। महंत हरिओम गिरि ने बताया कि प्रशासन की टीम मड़ी पर पहुंची थी। सफाई कराई गई है।
महंत ने बताया कि यह मड़ी प्राचीन है और इस मड़ी से एक सुरंग दूर कहीं जाती है। यह सुरंग कहां जाती है इसकी जानकारी तभी हो सकेगी जब इसकी खोदाई कराई जाए। वहीं दूसरी ओर डीएम ने बताया कि फिलहाल तो मड़ी की सफाई कराई गई है। जिससे प्राचीन स्थल की सही जानकारी हो सके। अभी इस स्थान के बारे में जानकारी की जा रही है।