ये आंकड़े शहर की सिर्फ दो दुकानों के हैं। यही स्थिति जिले भर में 1239 कोटेदारों द्वारा किए जा रहे सत्यापन के दौरान देखने को मिल रही है। जिले में 5.50 लाख राशनकार्ड धारक हैं। इनमें 30090 अंत्योदय (गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले) तथा शेष पात्र गृहस्थी राशनकार्ड धारक हैं।
इनसे जुड़े 22.90 लाख उपभोक्ता हैं। जिन्हें सरकार कोरोना काल के बाद से ही प्रति यूनिट पांच किलो मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध करा रही है। अभी तक जिले में कुल 22 फीसदी उपभोक्ताओं का ही सत्यापन हो सका है।
2011 की जनगणना के आधार पर बने हैं राशनकार्ड
शासनादेश के मुताबिक शहर में रहने वाली आबादी के 64 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले 79 फीसदी उपभोक्ताओं को ही राशनकार्ड से जोड़ा जा सकता है। जिले में जो राशनकार्ड बने हैं वे 2011 की जनगणना के आधार पर बने हैं। वर्ष 2016 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राशनकार्ड बनाए गए हैं। उसके बाद से जनसंख्या में करीब 30 फीसदी वृद्धि हो चुकी है, लेकिन राशनकार्डों की संख्या नहीं बढ़ी है।
शासन के निर्देश पर तीन महीने पहले भी उपभोक्ताओं से घोषणापत्र भरवाने का अभियान चलाया गया था। इसके तहत करीब 3000 उपभोक्ताओं का नाम निरस्त किया गया था। बायोमीट्रिक केवाईसी के माध्यम से 100 फीसदी पात्र उपभोक्ताओं का सत्यापन हो जाएगा। ये अभियान पूरे महीने चलेगा। इसके आधार पर जो नाम कम होंगे, उसके हिसाब से पात्र लोगों के राशनकार्ड बनाए जाएंगे। - अजय प्रताप सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी