सिविल लाइंस निवासी हरदोई कलक्ट्रेट में कार्यरत हैं। उनकी पत्नी शिक्षिका हैं। बताया कि पांच अगस्त की रात पत्नी के मोबाइल पर एक कॉल आई। दूसरी तरफ से रिश्तेदार बनकर बात की गई। इसके बाद एक लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।
साइबर अपराधी ने आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए आवाज बदलकर शिक्षिका को फोन किया। आरोपी ने खुद को शिक्षिका का रिश्तेदार बताकर एक लाख रुपये ट्रांसफर करने को कहा। शिक्षिका को आरोपी की आवाज हूबहू रिश्तेदार की लगी। जिस कारण उन्होंने आरोपी के बताए खाते में रकम ट्रांसफर कर दी।
पीड़िता ने साइबर ठगी की जानकारी होने के अगले ही दिन पुलिस लाइन पहुंचकर साइबर सेल में शिकायत दर्ज करा दी थी। तब तक आरोपी केवल पांच हजार रुपये ही निकाल पाया था। साइबर सेल ने बैंक खाते की डिटेल निकलवाई, जिससे पता चला कि रकम हरियाणा के पलवल स्थित एचडीएफसी की शाखा के खाते में ट्रांसफर की गई है। इसके बाद साइबर सेल के प्रभारी और उनकी टीम ने बैंक और एजेंसियों से संपर्क कर रकम खाते में ही फ्रिज करा दी है।
खातों में फ्रिज की रकम को वापस कराने की एक प्रक्रिया होती है। 547 सीआरपीसी के तहत अदालत के आदेश पर बैंक द्वारा खाताधारक के खाते में रकम वापस कराई जाती है। इसी के तहत पीड़िता की ओर से कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया है। कोर्ट संबंधित थाने की पुलिस से पूरे मामले की जांच रिपोर्ट मांगी की। इसके बाद बैंक को आदेश दिया जाएगा कि पीड़िता को उसके खाते में रकम वापस की जाएगी।
इस तरह साइबर अपराधी बदल रहे आवाज
वॉयस क्लोनिंग आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए किसी की भी आवाज की नकल करने के लिए सिर्फ तीन से पांच सेकेंड का वीडियो चाहिए। साइबर अपराधी फेसबुक, इंस्टाग्राम या यूट्यूब पर सर्च कर किसी भी आवाज का सैंपल ले लेते हैं। इसके बाद वाॅयस क्लोन कर उनके परिचित, रिश्तेदारों को फोन करते हैं। आवाज की क्लोनिंग ऐसी होती है कि पति-पत्नी, पिता पुत्र और सगे संबंधी तक आवाज नहीं पहचान पाते हैं।