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UP: मुरादाबाद बीएसए कार्यालय के रिश्वतखोर लिपिक को पांच साल की कैद, नियुक्तिपत्र देने की एवज में मांगी थी रकम

Thu, 27 Mar 2025 05:41 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद

सार

विशेष अदालत ने अमरोहा बीएसए के लिपिक रिश्वत लेने का दोषी पाते हुए पांच साल की सजा सुनाई है। उस पर कोर्ट ने 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। दोषी के खिलाफ 2011 में अमरोहा थाने में केस दर्ज किया गया था। 
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कोर्ट का फैसला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विशेष अदालत ने नियुक्तिपत्र देने के बदले आवेदकों से रिश्वत लेने वाले अमरोहा बीएसए के लिपिक को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत पांच साल की सजा सुनाई। अदालत ने लिपिक पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। दोषी लिपिक वर्तमान में मुरादाबाद बीएसए कार्यालय में तैनात है।

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अमरोहा के ग्राम जोजखेड़ा निवासी सोनू, गजय सिंह, हितेश और पीरगढ़ निवासी प्रदीप कुमार सात जुलाई 2011 को बीएसए कार्यालय में नियुक्तिपत्र लेने गए थे। कार्यालय में तैनात नियुक्ति लिपिक धर्मेंद्र कुमार ने प्रत्येक से पांच सौ रुपये रिश्वत मांगी। इसके अलावा अन्य लोगों से भी धर्मेंद्र ने अवैध धन की मांग की।

सभी आवेदकों ने शपथपत्र देकर थाना अमरोहा में शिकायत की। शिकायत के बाद अमरोहा थाने में लिपिक धर्मेंद्र के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई थी। सीओ सदर ने विवेचना कर धर्मेंद्र के विरुद्ध न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल कर दिया। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश कमलेश्वर पांडेय की भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट संख्या दो में चल रही थी।
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अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में 14 गवाह पेश किए गए। अदालत ने लिपिक धर्मेंद्र कुमार को रिश्वत मामले में दोषी ठहराते हुए पांच साल की सजा सुनाई और उस पर दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

आपत्तिजनक पोस्ट करने पर हो चुका है निलंबित
धर्मेंद्र कुमार अक्तूबर 2023 में डीआईओएस कार्यालय मुरादाबाद में तैनात था। उसने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट कर दी थी। पोस्ट वायरल होने पर इसकी जानकारी भाजपा नेताओं को हुई तो उन्होंने तत्कालीन जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह से शिकायत की थी। इसकी जांच अधिकारियों से करवाने के बाद डीएम ने धर्मेंद्र को निलंबित कर दिया था।

रिश्वत से भारतीय संस्कृति पर हुआ आघात
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत में तर्क दिया कि लिपिक धर्मेंद्र का यह पहला अपराध है। धर्मेंद्र के परिवार में पत्नी और छोटे बच्चे हैं इसलिए उसे कम सजा सुनाई जाए। अभियोजन अधिकारी सौरभ तिवारी और अवधेश शर्मा ने अदालत में कहा कि धर्मेंद्र द्वारा रिश्वत लेने से शिक्षा विभाग की छवि धूमिल हुई है। भारतीय संस्कृति में शिक्षक का दर्जा भगवान से ऊपर माना गया है। पवित्र पद को धारण करने वाले व्यक्तियों से अवैध धन की मांग करना भारतीय संस्कृति को आघात पहुंचाने जैसा है।
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मान्यता जैसे महत्वपूर्ण पटल पर है कार्यरत
वर्तमान में धर्मेंद्र कुमार की तैनाती बीएसए कार्यालय मुरादाबाद में है। उसके पास जिले में नए स्कूलों की मान्यता देने का महत्वपूर्ण पटल है। बीच-बीच में स्कूलों को मान्यताएं देने को लेकर भी आपसी विवाद सामने आए हैं।

धर्मेंद्र कुमार के खिलाफ किसी फैसले संबंधी जानकारी नहीं है। बरेली से जानकारी मिलने के बाद उसी आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी। -मनोज कुमार द्विवेदी, संयुक्त शिक्षा निदेशक द्वादश मंडल
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