करोड़ों के बिल घूम रहे पर माल नहीं
देश में वस्तु एवं सेवा कर लागू होने के बाद टैक्स सिस्टम को पारदर्शी बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया था। इसी व्यवस्था का सबसे अधिक दुरुपयोग इनपुट टैक्स क्रेडिट चेन के माध्यम से किया जा रहा है। हाल के महीनों में स्टेट जीएसटी द्वारा कुछ ऐसे नेटवर्क पकड़े गए हैं, जो असली व्यापार किए बगैर कागजी बिलों के जरिये करोड़ों रुपये का टैक्स क्रेडिट ले लिए हैं।
राज्य कर विभाग ने लखनऊ के अंकित कुमार की फर्मों को उजागर कर लोहे के स्क्रैप का अवैध धंधा पर गहरी चोट पहुंचाई है। पता चला है कि बोगस फर्मों के माध्यम से अंकित ने लखनऊ से मुजफ्फर नगर और पंजाब तक एक नेटवर्क खड़ा कर दिया था। इस नेटवर्क के माध्यम से लोहे के कारोबारियों ने फर्जी अभिलेखों के आधार पर अरबों का कारोबार किया।
मुरादाबाद और मुजफ्फरनगर जिले के राज्य कर अधिकारियों ने मुकदमा दर्ज कराकर इस नेटवर्क का खुलासा किया है लेकिन अभी भी देश के अन्य राज्यों में फैले नेटवर्क का खुलासा नहीं हुआ है। अन्य नेटवर्क की जांच होने पर टैक्स चोरी का दायरा बढ़ता जाएगा।
पता चला है कि कारोबारियों का एक गिरोह एक फर्म का पंजीयन कराकर दूसरे कारोबारियों को फर्जी बिल जारी कर रहे हैं लेकिन माल की बिक्री नहीं करते हैं। वहीं आईटीसी अपने जीएसटीआर 3-बी में क्लेम कर देते हैं। इसी प्रकार फर्जीवाड़े का खेल चल रहा है।
कुछ फर्में फर्जी बिल और ईवे बिल बनाती हैं। इन फर्मों के प्रोपराइटर मजदूर, ड्राइवर या झुग्गी बस्ती में रहने वाले व्यक्ति भी होते हैं। उनके नाम से पैन कार्ड,आधार कार्ड आदि बनवाकर कारोबारी अपना काला धंधा चमका रहे हैं। लकड़ी की फर्मों की जांच के दौरान राज्य कर अधिकारियों ने इस प्रकार का फर्जीवाड़ा पकड़ा था।