मुरादाबाद। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय की वार्षिक परीक्षाएं 15 जुलाई से प्रस्तावित हैं, लेकिन विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में ड्यूटी करने वाले महाविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारियों के अलावा अन्य विद्यालयों से आने वाले शिक्षकों को दिसंबर 2019 से भुगतान नहीं किया गया है। इससे अब कालेजों को परीक्षा ड्यूटी के लिए कर्मचारियों की समस्या हो रही है। विवि अधिकारियों का कहना है कि शासन से बजट न मिलने की वजह से इस वर्ष भुगतान करने में समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
विश्वविद्यालय ने 2019 में विधि सेमेस्टर परीक्षा, बीबीए सेमेस्टर परीक्षा 2019, सुधार परीक्षा 2019, मुख्य परीक्षा 2020, विधि सेमेस्टर परीक्षा 2020, प्रयोगात्मक परीक्षा 2020, विधि सेमेस्टर दिसंबर 2020, सुधार परीक्षा 2020, विधि सेमेस्टर अप्रैल 2021 का आयोजन किया है। परीक्षा प्रभारियों का कहना है कि पिछले वर्ष मुख्य परीक्षा से पहले विश्वविद्यालय से भुगतान की मांग की गई थी, लेकिन उन्होंने कोरोना संक्रमण होने की बात कहकर टाल दिया था। इसके बाद भुगतान मार्च 2021 में करने का आश्वासन दिया था। फिर कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर आ जाने की वजह से भुगतान अटक गया है। विद्यार्थियों से 2020 की परीक्षाओं की फीस विश्वविद्यालय ने अक्तूबर-नवंबर 2019 में ले ली थी। परीक्षा प्रभारी केजीके कालेज डॉ. एके सिंह ने बताया कि इन परीक्षाओं के अलावा 2019-20 की उत्तर पुस्तिका नोडल केंद्रों पर पहुंचाना और एलएलबी द्वितीय सेमेस्टर 2020 के यात्रा भत्ता आदि का भी विश्वविद्यालय ने भुगतान नहीं किया है। कालेज का करीब 13 लाख रुपये का भुगतान विश्वविद्यालय को करना है। भुगतान न होने की वजह से कर्मचारियों में रोष है।
परीक्षा प्रभारी हिंदू कालेज डॉ. संजय रस्तोगी ने बताया कि करीब 300 शिक्षक और कर्मचारियों का परीक्षा ड्यूटी का करीब 16 लाख रुपये का भुगतान लंबित है। मुख्य परीक्षाओं की ड्यूटी शिक्षकों और कर्मचारियों ने कोरोना काल में की है। विश्वविद्यालय को कम से कम 50 फीसदी भुगतान परीक्षा के समय ही करना चाहिए। संकलन केंद्र का भी बजट नहीं मिला है।
पहले परीक्षा होने के दो से तीन महीने में परीक्षा ड्यूटी का भुगतान कर दिया जाता था, लेकिन अब कोरोना संक्रमण काल होने की वजह से शासन की ओर से बजट नहीं मिला है। जैसे ही बजट मिल जाएगा, उसी के आधार पर कालेजों को भुगतान कर दिया जाएगा। इस महीने के अंत तक सभी कालेजों के भुगतान होने की उम्मीद है।
-डॉ. अमित सिंह, मीडिया प्रभारी, एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय