गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 50 रूपये से बढ़ाकर 1975 रूपये, जौ का 75 रू. से बढ़ाकर 1600 रू; चने का 225 रू. से बढ़ाकर 5100 रू.; मसूर का 300 रू. से बढ़ाकर 5100 रू.; सरसों का 225 रू. से बढ़ाकर 4650 रू.; कुसुम का 112 रू. से बढ़ाकर 5327 रू. प्रति क्विंटल कर दिया गया है।
नकवी ने कहा कि मोदी सरकार किसानों के सशक्तिकरण को प्रतिबद्ध है। 2009-10 में यूपीए के समय कृषि बजट 12 हजार करोड़ था जिसे बढ़ाकर मोदी सरकार ने एक लाख 34 हजार करोड़ रुपये किया। 22 करोड़ से ज्यादा किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड दिए गए हैं।
पीएम फसल बीमा का लाभ आठ करोड़ किसानों को दिया गया है। मोदी सरकार द्वारा 10,000 नये फार्मर्स प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन पर 6,850 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। आत्मनिर्भर पैकेज के तहत कृषि क्षेत्र के लिए एक लाख करोड़ की घोषणा की गई।
किसानों के लोन के लिए पहले के आठ लाख करोड़ के बदले अब 15 लाख करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। “प्रधानमंत्री किसान मान-धन” के तहत किसानों को 60 वर्ष की आयु होने पर न्यूनतम 3000 रुपये प्रति माह पेंशन का प्रावधान किया गया है। एमएसपी के भुगतान की बात करें तो मोदी सरकार ने छह साल में सात लाख करोड़ रुपए किसानों को भुगतान किया है जो यूपीए सरकार से दोगुना है।
नकवी ने कहा कि कांग्रेस एंड कंपनी का कहना है कि अनुबंधित कृषि समझौते में किसानों का पक्ष कमजोर होगा और वे कीमतों का निर्धारण नहीं कर पाएंगे, जबकि सच यह है कि किसान को अनुबंध में पूर्ण स्वतंत्रता रहेगी कि वह अपनी इच्छा के अनुरूप दाम तय कर उपज बेच सकेंगे। यदि किसान अनुबंध से संतुष्ट नहीं होंगे तो किसी भी समय अनुबंध खत्म कर सकते हैं। किसानों के हितों की 100 प्रतिशत गारंटी हैं कृषि सुधार विधेयक।