ठाकुरद्बवारा क्षेत्र में बरात 29 अप्रैल को आई थी। कविराज शादी समारोह में रात 12:00 बजे पहुंचे थे। करीब तीन घंटे बाद शादी की रस्में में संपन्न हो जाने पर उन्होंने जाने की बात कहकर कार स्टार्ट की और पत्नी और बच्चों में अन्य लोगों को बैठा लिया। इस पर कविराज को उसके मामा संजय सिंह और अन्य रिश्तेदारों ने कहा कि अभी मत जाओ। दिन निकल आने दो लेकिन कविराज नहीं माने और अपने घर के लिए कार लेकर चल पड़े। दस मिनट बाद ही करनपुर कांठ मार्ग पर आने पर गांव सरकड़ा परमपुर माफी के पास ट्रैक्टर-ट्राॅली की टक्कर से मौत हो गई। पत्नी और बेटी भी दुर्घटना का शिकार हो गई। अब परिवार में लक्ष्य ही शेष है। वह सिर्फ 12 वर्ष का है। कविराज सिंह के भाई सोमेंद्र सिंह ने बताया कि कविराज सिंह खेती किसानी कर अपने परिवार का पालन पोषण करते थे।
आराध्या को माता-पिता करते थे बेहद प्यार
ठाकुरद्वारा। मासूम आराध्या कक्षा आठवीं में पढ़ती थी। वह पूरे परिवार की बहुत दुलारी थी। माता-पिता भी उसे बेहद प्यार करते थे। दुर्घटना के समय आराध्या अपनी मां की गोद में थी। दुर्घटना इतनी भयानक थी कि तीनों मृतकों के शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। कविराज की मां पूनम देवी, बहन कविता और भाई सोमेंद्र सिंह परिवार में तीन लोगों की मौत से बेहद दुखी हैं। उनकी आंखों से आंसू नहीं रुक रहे हैं। अब सबकी कोशिश कविराज सिंह के एकमात्र वारिस लक्ष्य को बचाने की है। परिजन उसके शीघ्र स्वस्थ होने की ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं।
तीन लोगों की मौत से शादी की खुशियां गम में बदली
ठाकुरद्वारा। दुर्घटना में कविराज सिंह, उनकी पत्नी और पुत्री की मौत से गांव खाईखेड़ा में चल रही शादी की खुशियां गम में बदल गई। शादी की सभी रस्में पूरी होने के बाद विदाई की रस्म चल रही थी। लेकिन जब पता चला कि दुर्घटना में कविराज सहित तीन लोगों की मौत हो गई है तो शादी की खुशियां गम में बदल गई। गमगीन माहौल में विदाई की रस्म हुई।