विल्सन ने रूबी को दवाएं देने के साथ ड्रिप चढ़ाई। इसके कुछ देर बाद ही उसकी हालत बिगड़ने लगी तो विल्सन ने ऑपरेशन करने की बात कही। इसके बाद विल्सन ने नया गांव सुलतानपुर निवासी झोलाछाप मुस्तफा को फोन कर बुलाया। तीन अक्तूबर की रात करीब 12 बजे दोनों झोलाछापों ने परिजनों की सहमति के बिना ही रूबी का ऑपरेशन शुरू कर दिया।
इस दौरान रूबी की मौत हो गई। घटना के बाद गुस्साए परिजनों ने हंगामा किया था। सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और युग मेडिकल सेंटर को सील कर दिया। मामले में विल्सन और मुस्तफा के खिलाफ गैर इरादतन हत्या समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
पुलिस ने दोनों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया था। बाद में दोनों जमानत पर जेल से बाहर आ गए थे। मामले की सुनवाई अपर जिला जज स्पेशल (एमपी-एमएलए कोर्ट) तृतीय की अदालत में चल रही थी। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने पैरवी की।
शनिवार को अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर झोलाछाप विल्सन और मुस्तफा को दोषी करार दिया। साथ ही दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 11-11 हजार का जुर्माना भी लगाया है।
कार्रवाई नहीं करने के आरोप में तत्कालीन डीएम और सीएमओ को अवमानना नोटिस जारी
झोलाछाप विल्सन और मुस्तफा को उम्रकैद की सजा सुनाने के साथ ही कोर्ट ने अमरोहा के तत्कालीन डीएम और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव चौधरी के मुताबिक दोनों अधिकारियों पर आरोप है कि उनके कार्यकाल में जिले में झोलाछापों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई जबकि सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे।
अदालत ने निर्देशों के अनुपालन में बरती गई लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए दोनों तत्कालीन अधिकारियों से जवाब तलब किया है। साथ ही मुख्य सचिव को नोटिस भेजकर दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
झोलाछाप विल्सन की पत्नी को भी बनाया था आरोपी
पीड़ित नेम सिंह ने घटना के बाद दी गई तहरीर में झोलाछाप विल्सन की पत्नी को भी आरोपी बनाया था। पुलिस ने मामले की विवेचना की तो उसके खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। इसके बाद विवेचना के दौरान उसका नाम निकाल दिया गया। पुलिस ने विल्सन और मुस्तफा के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया था।