घूस लेकर ट्रांसफर - पोस्टिंग किए जाने के शोर के बीच बेसिक शिक्षा विभाग में तबादलों का दौर 19 दिसंबर तक जारी रहा। वो भी तब जबकि 14 दिसंबर को तबादला प्रकरण में जांच बैठा दी गई थी। महकमे का रिकार्ड बताता है कि इस दौरान 72 शिक्षकों की तबादला/ संशोधन लिस्ट ओके कर दी गई।
ऐसा तब हुआ जबकि ट्रांसफर - पोस्टिंग के लिए बाकायदा डीएम की अध्यक्षता में बोर्ड गठित है। उच्च स्तरीय बोर्ड होने के बावजूद बेसिक शिक्षा विभाग में हुए इस बड़े ट्रांसफर घोटाले में अफसरों पर उंगलियां उठना स्वाभाविक है।
जिन्हें वास्तविक जरूरत है वो शिक्षक - शिक्षिकाएं हाथों में प्रार्थना पत्र लेकर जहां - तहां हाकिमों के दफ्तरों में भटकते रह गए और जुगाड़ वाले 72 शिक्षकों ने मनचाहा स्कूल पा लिया। 19 दिसंबर को ट्रांसफर बोर्ड की ओर से जारी की गई आखिरी लिस्ट में पांच शिक्षकों का नाम था।
इनमें से दो ने बताया कि उन्हाेंने एक साहब के स्टेनो से संपर्क कर मनचाहे तबादले के लिए तय फीस चुकाई। हालांकि अभी तक बेसिक शिक्षकाें के तबादले, संशोधन और पदोन्नित में केवल बीएसए कांता प्रसाद पर ही भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं।
लेकिन बड़ा सवाल ये है कि जब बीएसए के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों और अनियमितताओं में डीएम ने 14 दिसंबर को जांच बैठा दी तो फिर उन्हीं की अध्यक्षता वाले बोर्ड ने 19 दिसंबर को पांच शिक्षकों का तबादला कैसे परिवर्तित कर दिया।