मुरादाबाद। व्यापारी के अधिक जमा टैक्स वापसी के भुगतान की प्रक्रिया जटिल है और वर्षों तक लंबित रहती है। इसमें संशोधन की आवश्यकता है। अगले वर्ष में ही वापसी भुगतान की व्यवस्था की जाए। देरी होने पर वापसी की धनराशि, ब्याज के साथ व्यापारी को वापस मिले। यह बात लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य कर के प्रमुख सचिव एम देवराज से कही। उद्यमियों ने जीएसटी से संबंधित कई मुद्दे उनके सामने रखे। व्यापारियों ने कहा कि जीएसटी रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि के सार्वजनिक अवकाश होने पर उसे अगले दिन तक स्वतः बढ़ाया जाए। ई-वे जारी बिल पर माल वापसी या प्राकृतिक आपदा व खराबी की दशा में माल लौटाने की सूचना पोर्टल पर अपडेट करने का कोई विकल्प नहीं है। खरीद वापसी के लिए ई-वे बिल में एक अलग श्रेणी (हेड) बनाएं। इससे करदाता को अनावश्यक नोटिस मिलने से राहत मिलेगी। माल पकड़े जाने पर माल की कीमत का 100 प्रतिशत पेनाल्टी के रूप में आरोपित किया जाता है जिसको व्यापारी को तत्काल जमा कराना होता है। इसे समाप्त किया जाना चाहिए। विभाग द्वारा अक्सर 3-4 वर्ष पुराने माल परिवहन के प्रमाण स्वरूप टोल रसीद मांगी जाती है, जो व्यावहारिक नहीं है। जीएसटी अधिनियम में प्रदत्त सीआरएस की प्रणाली अब तक लागू नहीं हो पाई है। जीएसटी प्रकरणों पर विभागीय जांच व समीक्षा व्यापार वर्ष के 3-4 वर्ष के बाद की जाती है। यह अगले वित्तीय वर्ष में ही होनी चाहिए।
किसी व्यापारी का किसी कमी के कारण यदि बकाया रह गया हो, बकाया पर ब्याज व पेनाल्टी उद्यमी से तत्काल जमा कराई जाती है जबकि उद्यमी के क्रेडिट लेजर में धनराशि होती है। प्रमुख सचिव ने उद्यमियों को समस्याओं को सरकार के सामने रखकर निराकरण कराने का आश्वासन दिया। इस मौके पर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र सिंह, प्रदेश महामंत्री अमित अग्रवाल, राघव सिंह, निखिल गुप्ता, रचित महेश्वरी आदि मौजूद रहे।