बहजोई विकास खंड के परतापुर गांव में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण घपलेबाजी हुई। लाभार्थियों के नाम से कागज में शौचालय बनाकर रुपये हड़पे गए हैं। अधिकारियों की जांच में इसकी पुष्टि हुई। जबकि गांव को विकास के लिए मिली धनराशि में कुल 24 लाख 48 हजार 687 रुपये के गबन होने की जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी गई है। इस धनराशि में ग्राम पंचायत निधि के दुरुपयोग का मामला भी शामिल है।
बहजोई विकास खंड के परतापुर गांव निवासी ओमप्रकाश, वेद प्रकाश आदि ने शपथ पत्र के साथ ग्राम पंचायत के विकास कार्यों में धांधली करके रुपये हड़पने की शिकायत जिलाधिकारी के सामने दर्ज कराई थी। जिलाधिकारी ने इस पर जांच के आदेश दिए। जिला पंचायत राज अधिकारी जाहिद हुसैन, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अवर अभियंता संदीप कुमार, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के जिला कंसलटेंट नरेंद्र सिंह और सहायक विकास अधिकारी पंचायत राजकुमार ने जांच की।
जांच में 24 लाख 48 हजार 687 रुपये के गबन का अंदेशा सामने आया। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण, कर्मशाला निर्माण और हैंडपंप रीबोर में यह धनराशि का व्यय होना दर्शाया गया है पर मौके पर जांच टीम को काम नजर नहीं आ रहे हैं। इसलिए इस धनराशि के गबन के अंदेशे का उल्लेख करते हुए जांच रिपोर्ट प्रेषित की गई है। जिला पंचायत राज अधिकारी ने ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव से जवाब मांगा है, लेकिन पांच फरवरी तक इन दोनों ने अपना जवाब दाखिल नहीं किया है।
जिला पंचायत राज अधिकारी से जब इस विषय में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी ने प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 15 दिन में प्रधान और पंचायत सचिव को जवाब दाखिल करना था पर किसी ने भी जवाब दाखिल नहीं किया है।
कागजों में बन गए इनके शौचालय
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के अंतर्गत 12,000 रुपये की लागत से शौचालय बनाया जाता है। इसमें दो किस्तों में धनराशि जारी की जाती है। परतापुर निवासी विजयपाल, रामवती, रामनिया, साहिबा, वीरवती, रामवीर, लीलावती, रामकिशोर, रामश्री समेत 34 लाभार्थी ऐसे हैं जिनके नाम शौचालय बनाने के लिए दो किस्तें जारी हो गईं पर शौचालय नहीं बने। पहली किस्त लाभार्थी को भेजी गई और दूसरी किस्त ग्राम पंचायत निधि में भेजी गई थी, लेकिन लाभार्थी पहली किस्त की धनराशि निकाल कर घर बैठ गए। ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव ने दूसरी किस्त की धनराशि लेकर भी काम नहीं कराया। जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
जिन लाभार्थियों ने धनराशि निकालने के बाद भी शौचालय नहीं बनाए हैं उनसे वसूली की जाएगी। ग्राम पंचायत सचिव और तत्कालीन प्रधान पर कार्रवाई होगी क्योंकि पहली किस्त लाभार्थी के खाते में दी गई और दूसरी किस्त की धनराशि ग्राम निधि के खाते में भेजी गई। कर्मशाला, हैंडपंप के रीबोर और अन्य विकास कार्यों के लिए जारी धनराशि में भी गबन सामने आ रहा है। इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी गई है।
जाहिद हुसैन, जिला पंचायत राज अधिकारी, संभल