गड्ढे में दबाने की कोशिश
शिकायत में कहा गया है कि तीन दिन पूर्व बुधवार को तीन वर्षीय बेटे को मोहल्ले के शरारती तत्वों ने घर के बाहर से उठा लिया। बच्चे के मुंह पर कालिख पोती, ताकि कोई पहचान न हो सके। फिर जमीन में गड्ढा खोदकर दबाने की कोशिश की। बच्चा किसी तरह बाहर निकल आया तो आरोपियों ने उसे बिजली के खंभे पर टांग दिया। बच्चे का गला दबाने की कोशिश की गई। रास्ते में कुछ लोगों को आता देख बच्चे को नीचे उतार लिया।
शिकायत करने पर पिता पर भी हमला
मासूम का मुंह काला कर खंबे से लटकाने के मामला प्रकाश में आने के बाद जब शुक्रवार दोपहर को पीड़ित मासूम के पिता आरोपियों के घर शिकायत करने पहुंचे तो उल्टा उन्हें ही धमकाया गया। इसी को लेकर मारपीट शुरू कर दी। लाठी-डंडे भी चल गए। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।
मासूम के साथ हरकत से हर कोई स्तब्ध
हसनपुर। उझारी में मासूम के साथ शरारती तत्वों द्वारा की गई शर्मनाक हरकत से हर कोई स्तब्ध है। यह घटना समाज व अभिभावकों को आत्मचिंतन के लिए मजबूर करती है। इस घटना में शामिल शरारती तत्वों में आठ-आठ साल के दो बालक और 15-15 साल के दो किशोर शामिल बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि इतनी कम उम्र के बच्चों और किशोरों के जेहन में यह गंदी और आपराधिक सोच कैसे पनपी? क्या वे ऐसे दूषित सामाजिक या पारिवारिक माहौल में पल-बढ़ रहे हैं, जहां उन्हें सही और गलत का फर्क नहीं सिखाया जा रहा है?
उठे सवाल
क्या माता-पिता अपने बच्चों की गतिविधियों और उनके द्वारा देखे जा रहे कंटेंट पर ध्यान दे रहे हैं? क्या वे उन्हें पर्याप्त समय और नैतिक मार्गदर्शन दे रहे हैं?
स्कूलों में केवल पाठ्यक्रम ही नहीं, बल्कि बच्चों की मानसिक और नैतिक परवरिश पर कितना ध्यान दिया जा रहा है?
समाज और पुलिस-प्रशासन को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए? क्या सार्वजनिक स्थलों पर निगरानी की कमी है?
क्या किशोरों को आसानी से उपलब्ध होने वाले हिंसक या विकृत कंटेंट ने उनकी सोच को प्रभावित किया है?