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Moradabad News: मुरादाबाद में स्वाइन फ्लू के तीन मरीज, आशियाना निवासी डॉक्टर भी संक्रमित

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मुरादाबाद। जिले में स्वाइन फ्लू (एच1एन1) का संक्रमण पैर पसारने लगा है। आशियाना निवासी डॉ. मयंक वर्मा में स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने के बाद जिले में संक्रमित मरीजों की संख्या तीन पहुंच गई है। लाइनपार निवासी मुनेश देवी में भी स्वाइन फ्लू के लक्षण मिलने के बाद जांच कराई गई, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। स्वास्थ्य विभाग संक्रमित मरीजों और उनके संपर्क में आए लोगों की निगरानी कर रहा है।
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आशियाना निवासी 42 वर्षीय डॉ. मयंक वर्मा को तीन दिन पहले तेज बुखार, जुकाम और अत्यधिक कमजोरी की शिकायत हुई थी। जांच में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। डॉक्टर का इलाज शुरू कर दिया गया है। उनके साथ रहने वाले माता-पिता को भी एहतियातन दवा दी गई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में अब तक तीन मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने दिल्ली-एनसीआर में बढ़ रहे एच1एन1 संक्रमण को देखते हुए मुरादाबाद में भी सतर्कता बढ़ा दी है। सरकारी अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के इलाज की दवा उपलब्ध कराई गई है। सेंट्रल ड्रगवेयर हाउस से ओसेल्टामिविर दवा जिले के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में भेजी गई है। जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए 15 बेड आरक्षित किए गए हैं। इनमें पांच आईसीयू और 10 सामान्य वार्ड के बेड शामिल हैं। गंभीर मरीजों को जरूरत पड़ने पर यहां भर्ती किया जा सकेगा। सीएमओ डॉ. कुलदीप सिंह का कहना है कि बृहस्पतिवार दोपहर तक केवल एक केस था। दोपहर बाद दो और केस की पुष्टि हुई है। इनमें एक डॉक्टर और एक महिला शामिल हैं। अब संक्रमितों की संख्या तीन हो गई है। हालांकि सभी खतरे से बाहर हैं।


आरटीपीसीआर मशीन खराब, स्वाइन फ्लू की जांच पर संकट
- जिले में तीन मरीजों में संक्रमण की पुष्टि, संदिग्धों की जांच के लिए नमूने बाहर भेजने की मजबूरी



अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। स्वाइन फ्लू के मरीज सामने आने के बीच जिला अस्पताल की आरटीपीसीआर जांच व्यवस्था सवालों के घेरे में है। अस्पताल की आरटीपीसीआर मशीन खराब पड़ी है। ऐसे में स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों के नमूनों की जांच अस्पताल में ही नहीं हो पा रही है। नमूने जांच के लिए बाहर भेजने पड़ रहे हैं। जिले में अब तक तीन मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। ऐसे में संक्रमण की आशंका वाले मरीजों की जल्द जांच कराना जरूरी है, लेकिन मशीन खराब होने से रिपोर्ट आने में अतिरिक्त समय लग सकता है।
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इससे मरीजों की पहचान और उपचार शुरू करने की प्रक्रिया भी प्रभावित होने की आशंका है। अस्पताल प्रशासन ने मशीन स्थापित करने वाली कंपनी से संपर्क कर इंजीनियर बुलाने की प्रक्रिया शुरू की है। इससे फिलहाल संदिग्ध मरीजों के नमूने जांच के लिए बाहर भेजने की जरूरत पड़ रही है। चिकित्सकों के मुताबिक तेज बुखार, खांसी, जुकाम, गले में खराश, शरीर में दर्द और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सांस लेने में परेशानी या हालत बिगड़ने पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। संक्रमित मरीज को लक्षण शुरू होने के शुरुआती 48 घंटे में एंटीवायरल दवा मिलने पर उपचार अधिक प्रभावी माना जाता है।

वर्जन
आरटीपीसीआर मशीन को ठीक कराने के लिए एजेंसी के इंजीनियर को बुलाया गया है। किट के लिए भी ऑर्डर किया गया है। जल्द ही व्यवस्थाएं सुचारू हो जाएंगी। फिलहाल सैंपल मेरठ भेजे जा रहे हैं।
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- डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, एसआईसी
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