हजरत नगर गढ़ी थाने के हवालात में शबलू को पीट - पीटकर मौत के घाट उतारने वाले पुलिस कर्मियों में शामिल सिपाही हिमांशू तोमर शुरू से विवादों में रहा है। हजरत नगर गढ़ी से पहले पाकबड़ा थाने में तैनाती के दौरान भी उसका और तत्कालीन एसओ का नाम एक शव को ठिकाने लगाने में उछला था।
तब नया मुरादाबाद में नाले में पड़े मिले शव और पास पड़े तमंचे तो पब्लिक की सूचना पर पाकबड़ा पुलिस उठा ले गई थी, लेकिन वो शव बाद में कहां गया, आज तक कोई नहीं जान पाया। ये घटना करीब एक साल पुरानी है।
नया मुरादाबाद में खाली पड़ी आफिसर्स कालोनी के पास नाले में एक दिन सुबह - सुबह एक युवक का शव और पास में तमंचा कारतूस पड़े देख पब्लिक ने पाकबड़ा पुलिस को खबर दी थी। पुलिस शव उठाकर ले गई थी। चौकीदार और आसपास घास काटने वाली महिलाओं समेत दस से अधिक लोग इसके चश्मदीद थे।
लेकिन पब्लिक तब चौंकी जब पाकबड़ा पुलिस ने शव का न तो पोस्टमार्टम कराया और न ही यह पता चला कि मरने वाला कौन था और उसका शव कहां गया। इस मामले में तत्कालीन एसओ पाकबड़ा ओंकार सिंह और सिपाही हिमांशू तोमर का नाम उछला था।
जांच भी बैठी थी, लेकिन बाद में अफसरों ने चहेतों की गर्दनें बचा ली थीं। अब इसी सिपाही हिमांशू तोमर का नाम हजरत नगर गढ़ी थाने में हुई कस्टडी डेथ में भी सामने आया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पुलिस वालों की हैवानियत उजागर हो चुकी है।
पता चला है कि शराब के नशे में धुत पुलिस वालों ने शबलू को बेरहमी से मारा था। मनचाही बात उगलवाने में नाकाम रहने पर उसे करेंट भी लगाया था। हिमांशू तोमर एसओ का खास था और वसूली का जिम्मा उसी पर था।
गढ़ी के निलंबित एसओ परवेज चौहान का दामन भी दागदार रहा है। परवेज चौहान बागपत के रहने वाले हैं और पिछली तैनाती के दौरान भी उन पर तमाम संगीन आरोप लगे थे।एसएसपी नितिन तिवारी ने बताया कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। क्राइम ब्रांच को केस की तफ्तीश दी गई है ताकि निष्पक्ष और मजबूत विवेचना के जरिए दोषियों को सजा दिलाई जा सके।