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कोरोना अलर्ट : गर्भावस्था में संक्रमण हुआ तो भ्रूण के लिए हो सकता है खतरा

Fri, 21 May 2021 02:48 AM IST
दुष्यंत शर्मा अभिनव चौहान, मुरादाबाद

सार

  • शुरू के तीन माह अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत
  • दवाओं से हो सकता है गर्भपात, समय पूर्व प्रसव भी संभव 
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कोरोना की तीसरी लहर की आशंका बच्चों को लेकर चिंता बढ़ा रही है। तीसरी लहर से मुकाबले के लिए शासन-प्रशासन का युद्ध स्तरीय तैयारियों पर जोर है लेकिन मौजूदा वक्त में भी बच्चों की सुरक्षा गंभीर विषय है। खासकर गर्भस्थ शिशु या नवजात के लिए। अभी तक के चिकित्सकीय अनुभवों में माना गया है कि गर्भावस्था में कोरोना संक्रमण गर्भवती व भ्रूण के लिए खतरनाक हो सकता है। इस अवस्था में ली गईं कोरोना की मानक दवाएं गर्भस्थ शिशु के विकास पर असर डाल सकती हैं। इससे समय पूर्व प्रसव या गर्भपात जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

जानकारों का मानना है कि यदि गर्भावस्था के शुरू के तीन माह में महिला संक्रमित होती है तो उस दौरान कोरोना से बचाव के लिए दी जाने वाली दवाएं गर्भस्थ शिशु पर असर डालेंगी। ये वो महीने हैं जब गर्भ में शिशु का मस्तिष्क, हृदय और अन्य प्रमुख अंग बन रहे होते हैं। प्रारंभ में ही दवाओं का प्रभाव यदि शिशु विकास के क्रम पर पड़ा तो उसे कुछ जन्मजात बीमारियां घेर सकती हैं। दवाओं में प्रयोग होने वाला कोई साल्ट या रसायन उसके अंगों को विकृत कर सकता है। इसलिए स्त्री रोग विशेषज्ञ गर्भवतियों को इस संक्रमण काल में जहां घर से न निकलने की नसीहत देती हैं, वहीं संक्रमित हो जाने पर चिकित्सकीय देखरेख में दवाओं के नपे-तुले इस्तेमाल का भी सुझाव देती हैं।
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संक्रमण के दौरान नवजात को पिला सकती हैं दूध

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गर्भवती महिला - फोटो : shutterstock
स्त्री रोग विशेषज्ञों की राय :
पहले तीन सप्ताह किसी गर्भवती महिला के लिए बहुत संवेदनशील होते हैं। इसमें हम सामान्य तौर पर भी कोई दवा नहीं देते। कोरोना संक्रमण के कारण दी गई दवाएं इस अवस्था में भ्रूण पर काफी असर डालती हैं। इनसे गर्भपात, समय पूर्व प्रसव या जन्मजात रोग और विकृति का खतरा रहता है। ऐसी अवस्था न बने इसके लिए गर्भवती महिलाओं को चाहिए कि वह इस संक्रमण काल में चिकित्सक के पास जाने के अलावा कहीं न निकलें। अस्पताल जाने के दौरान भी अपनी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें।
- डॉ. बबीता गुप्ता, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ
 
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गर्भवती महिला
गर्भावस्था के दौरान माइल्ड इंफेक्शन है, कोई लक्षण नहीं है तो साधारण मल्टी विटामिन, विटामिन सी आदि की दवाएं देकर हम मां को सही करने की कोशिश करते हैं। लेकिन अगर संक्रमण ज्यादा है तो हम पहले मां को दवाएं देकर उसे स्वस्थ करने की कोशिश करते हैं। इस बीच गर्भस्थ शिशु पर उन दवाओं का क्या असर पड़ा इसे बाद में परीक्षण के आधार पर देखते हैं। इन दवाओं का असर तो गर्भस्थ शिशु पर होता है, लेकिन गर्भवती की सुरक्षा के लिए परिस्थिति अनुसार दवाएं देना मजबूरी बन जाती है। दवाओं के कारण शिशु पर ऐसा असर हो जो मां के लिए खतरनाक हो जाए तो हमारी प्राथमिकता मां को बचाना है।
- डॉ. पूनम सिंह, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ

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गर्भवती महिला - फोटो : gjk
प्रसव के दौरान किसी शिशु को संक्रमण हुआ हो, ऐसा मामला अभी चिकित्सकों के मुताबिक नहीं मिला है। डा. बबीता गुप्ता कहती हैं कि संक्रमण के दौरान पूरी सावधानी बरतते हुए मां नवजात को दूध पिला सकती है। इसके लिए वह नवजात को गोद में लेने से पूर्व साबुन से हाथ धोएं और खुद को अच्छी तरह सैनिटाइज कर लें। मास्क और फेस शील्ड पहनकर दूध पिलाएं। दूध पिलाने से बच्चे को संक्रमण की कोई संभावना नहीं है।
 
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गर्भवती महिला - फोटो : demo pics
मासिक धर्म के दौरान रखना होगा विशेष ध्यान
कोरोना संक्रमण के दौरान मासिक धर्म काल में युवतियों और महिलाओं को अपना विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। डा. बबीता गुप्ता कहती हैं कि मासिक धर्म के दौरान महिलाओं या युवतियों को कोरोना वैक्सीन लगवाने से कोई दुष्प्रभाव नहीं होगा। संक्रमण के दौरान यदि मासिक धर्म हो रहा है तो कोरोना की दवाएं खराब असर नहीं डालेंगी। इन दिनों कमजोरी ज्यादा होती है और संक्रमण के कारण शरीर और कमजोर हो जाता है, इसलिए अपने खान पान पर विशेष ध्यान रखें। पौष्टिक भोजन लें।
 
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गर्भवती
गर्भावस्था में इन बातों का रखें ध्यान
  • रोजाना हल्के गर्म पानी से नहाएं और साफ कपड़े पहनें
  • पौष्टिक और संतुलित भोजन करें
  • कार्बोहाइड्रेड और प्रोटीन युक्त भोजन करें
  • नियमित बाहर जाने वाले परिवार के लोगों के संपर्क में कम आएं
  • हवादार कमरे में ही रहें, एसी, कूलर का प्रयोग न करें
  • दिन में कम से कम आधा घंटे धूप लें, सुबह-शाम हल्के व्यायाम और प्राणायाम करें
मासिक धर्म काल में इन बातों का रखें ध्यान
  • सैनिटरी हाइजीन का ख्याल रखें
  • अंत:वस्त्रों और शरीर की सफाई का ख्याल रखें, दिन में दो बार कपड़े बदलें
  • बहुत गर्म या ठंडी चीजों और जंक फूड का सेवन न करें
  • दूध-दही से यदि परेशानी न होती हो तो उसका सेवन करें
  • पौष्टिक भोजन, हरी सब्जियों और प्रोटीन का सेवन अधिक करें
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