मुरादाबाद। उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर के फटने की घटना से जिले को फिलहाल तरह के खतरे की आशंका नहीं है। बाढ़ खंड के अधिकारियों ने भी किसी तरह के संभावित खतरे से इनकार किया है। इसके बाद भी जिले में मौजूद एसडीआरएफ की टीम को हेड क्वार्टर के निर्देश पर अलर्ट मोड पर रखा गया है।
चमोली में ग्लेशियर फटने की खबर मिलने के बाद से ही जिले में रामगंगा नदी किनारे बसे लोगों को संभावित बाढ़ के खतरे का डर सताने लगा। शहर के अन्य कई इलाकों के लोग भी इसे लेकर चिंतित हो उठे। चाय, पान की दुकानों से लेकर मोहल्लों तक में लोग इसको लेकर तरह-तरह की चर्चा करने लगे। लेकिन इन सभी आशंकाओं पर देर सायं डीएम ने विराम लगा दिया। डीएम राकेश कुमार सिंह ने बताया कि चमोली में ग्लेशियर फटने से जिले को फिलहाल किसी तरह का कोई खतरा नहीं है। उन्होंने बताया कि शासन से भी इससे संभावित खतरे वाले जिन 27 जिलों का उल्लेख किया गया है उसमें भी मुरादाबाद शामिल नहीं है। बाढ़ खंड के अधिशाषी अभियंता मनोज कुमार ने बताया कि रामगंगा नदी में किसी तरह का कोई जल स्तर नहीं बढ़ेगा। क्योकि ग्लेशियर का पानी जिस नदी में जा रहा है वह रामगंगा से अलग है। उन्होंने लोगों से किसी तरह की अफवाहों आदि पर ध्यान न देने की अपील लोगों से की है।
जिले में मौजूद एसडीआरएफ टीम के मुख्य आरक्षी चरन सिंह ने बताया कि फिलहाल मुरादाबाद में इससे किसी तरह का कोई खतरा नहीं है, लेकिन इसके बाद भी हेड क्वार्टर लखनऊ के निर्देश पर उनकी टीम अलर्ट मोड पर है। आसपास के किसी भी जिले में आवश्यकता पड़ने पर वह लोग तुरंत पहुंच कर बचाव व राहत का कार्य शुरू कर देंगे।