मुरादाबाद। मूंढापांडे थाने की पुलिस एक किशोर को बालिग बनाकर जेल भेजने के मामले में फंस गई है। किशोर के पिता का आरोप है कि उसने अपने अपने बेटे को नाबालिग होने के साक्ष्य पुलिस को दिए लेकिन पुलिस ने साक्ष्यों को दरकिनार कर उसे युवती से दुष्कर्म और अपहरण के मामले में जेल भेज दिया जबकि उसे राजकीय संप्रेक्षण गृह में भेजना था। एसएसपी के आदेश पर एसपी सिटी ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है।
मूंढापांडे क्षेत्र के गांव निवासी एक व्यक्ति ने 20 जून को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को प्रार्थनापत्र दिया था। इसमें उसने बताया कि उसका बेटा जून माह में एक युवती को बहला फुसलाकर अगवा कर ले गया था। पुलिस ने युवती को बरामद कर लिया और उसके बेटे को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने युवती की मेडिकल रिपोर्ट और बयानों के आधार पर केस में दुष्कर्म की धारा बढ़ा दी थी।
इसकी जानकारी मिलने पर अपने दूसरे बेटे के साथ मूंढापांडे थाने पहुंच गया और उसने थाना प्रभारी को बताया कि उसके बेटे की जन्म तिथि 11 सितंबर 2008 है। उसकी उम्र 16 साल 11 माह है। पिता का दावा है कि उसने अपने बेटे की हाईस्कूल की मार्कशीट भी दी लेकिन थाना प्रभारी ने उसे चौकी इंचार्ज के पास भेज दिया। पुलिस ने स्कूल के प्रधानाध्यापक से लिखवाकर लाने की बात कही। अगले दिन प्रधानाध्यापक ने भी लिखकर दे दिया है कि किशोर ने 2011 में हाईस्कूल उत्तीर्ण किया है। थाने पहुंचकर कागज दिखाए तो उन्होंने चौकी इंचार्ज से बात करने को कहा।
पिता का आरोप है कि नाबालिग को किशोर बोर्ड में भेजने के लिए उससे रुपये की मांग की गई। पिता का आरोप है कि उससे रुपयों की मांग इन्कार कर दिया। तब उसके बेटे को 28 जून को किशोर को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। पिता ने प्रधान मजिस्ट्रेट किशोर न्याय बोर्ड में प्रार्थनापत्र दिया। आठ जुलाई को किशोर को किशोर न्यायालय भेजा गया। एसएसपी ने एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह को इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं।
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इस मामले की जांच की जा रही है। शिकायत करने वाले व्यक्ति के बयान दर्ज किए गए हैं। दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
कुमार रणविजय सिंह, एसपी सिटी