- दसवीं उत्तीर्ण करने के बाद पढ़ाई छोड़ चुकी है छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाली छात्रा
- परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भी लाभ से वंचित हैं फतेहपुर विश्नोई न्याय पंचायत के बच्चे
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा (एनएमएमएस) फतेहपुर विश्नोई न्याय पंचायत के विद्यार्थियों के लिए छलावा बन गई है। परीक्षा में सफल होने के बाद भी विद्यार्थी लाभ से वंचित हैं। इसका कारण है कि न्याय पंचायत में राजकीय इंटर कॉलेज नहीं है और निजी स्कूलों में दाखिला लेने पर यह छात्रवृत्ति नहीं मिलती है। सिस्टम के नियमों और सरकारी स्कूल के अभाव में परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद एक छात्रा की तो पढ़ाई ही छूट चुकी है।
मुरादाबाद में वर्ष 2026-27 में 225 विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसमें फतेहपुर विश्नोई के 15 विद्यार्थी शामिल हैं। पिछले तीन वर्षों में 41 विद्यार्थियों ने सफलता प्राप्त की थी। इसके बावजूद राजकीय इंटर कॉलेज न होने की वजह से एक छात्रा ने दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी। गांव मुंडाला निवासी साहिबा ने कक्षा दस तक पढ़ाई एक राजकीय हाईस्कूल से की है। उसके पिता यूसुफ अली ने बताया कि बेटी पढ़ने में बहुत होशियार है। छात्रवृत्ति के रुपयों से ही हमने दस तक पढ़ाई करवाई है। दस से ऊपर की क्लास के लिए सरकारी विद्यालय नहीं मिला। इसलिए मजबूरी में कक्षा 11 में दाखिला नहीं करवाया है। इस निर्णय से हम बहुत दुखी हैं।
सफल होने के बाद भी लाभ से वंचित
फतेहपुर विश्नोई गांव की ही तीन छात्राएं खुशी, खुशनुम और सीमा ने आसपास सरकारी इंटर कॉलेज न होने की वजह से मजबूरी में प्राइवेट विद्यालय में कक्षा नौ में दाखिला लिया है। छात्राओं का कहना है कि हमने कड़ी मेहनत इसलिए की थी, ताकि हम छात्रवृत्ति परीक्षा पास कर लेंगे तो माता-पिता को कक्षा 12 तक की पढ़ाई के लिए फीस की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। लेकिन सरकारी इंटर कॉलेज के अभाव में परीक्षा पास करने के बाद भी हमें एक भी बार इस छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिला और परिजनों पर हर महीने विद्यालय में फीस जमा करने का बोझ पड़ गया।
11वीं व 12वी के विद्यार्थी छात्रवृत्ति से हो गए वंचित
गांव के 11 बच्चे कनक, वंशिका, ताज मुहम्मद, आदिल, मोमीन, कृष, शानू, आयुष, अरुण, अजीम और साबेद ऐसे छात्र हैं, जिन्होंने छात्रवृत्ति की परीक्षा उत्तीर्ण की तो परिजनों ने इनका दाखिला एक अशासकीय विद्यालय में करवा दिया। यह विद्यालय दसवीं तक ही अशासकीय ही है। इसकी वजह से कक्षा-10 तक एडेड स्कूल में छात्रवृत्ति मिली, लेकिन सरकारी इंटर कॉलेज न होने से और कक्षा 11 व 12 की छात्रवृत्ति से वंचित हो गए।
वर्जन...
मैंने 2023 में एनएमएमएस की परीक्षा पास की थी। लेकिन गांव के आसपास कोई भी राजकीय इंटर कॉलेज न होने के कारण मुझे छात्रवृत्ति से वंचित होना पड़ा। मजबूरी में मुझे किसी तरह प्राइवेट विद्यालय में एडमिशन लेना पड़ा। छात्रवृत्ति परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए की गई मेरी मेहनत खराब गई। -वंशिका, फतेहपुर विश्नोई
कैंसर के कारण पिता की मृत्यु के बाद मेरी पढ़ाई रुक गई। कक्षा-08 तथा छात्रवृत्ति परीक्षा पास करने के बाद मैंने किसी तरह घर से 12 किमी दूर एक अशासकीय विद्यालय में प्रवेश तो ले लिया लेकिन आय का स्रोत न होने के कारण तथा आजीविका की खातिर घर पर रहना पड़ता है। इतनी दूर के विद्यालय में नियमित पढ़ने के लिए जाना संभव नहीं हो पाता।-दयानंद, दूल्हेपुर
इसमें हमारी क्या गलती है कि हम गरीबी के कारण न पढ़ पाएं। हमें बहुत कुछ करना है लेकिन सरकारी विद्यालय न होने के कारण हमारे गांव की लड़कियों को पढ़ाई छोड़ने को मजबूर होना पड़ रहा है। मुझे भी यही डर सता रहा है।-अंशिका, कक्षा आठ, कंपोजिट स्कूल, फतेहपुर विश्नोई
विद्यार्थी राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा के लिए 29 सितंबर तक आवेदन कर सकते हैं। यह छात्रवृत्ति कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों को मिलती है। इसके लिए प्रत्येक महीने एक हजार रुपये और कुल 48 हजार रुपये सरकार की ओर से दिए जाते हैं। यह छात्रवृत्ति राजकीय इंटर कॉलेजों और अशासकीय विद्यालयों में दाखिला लेकर पढ़ाई करने पर ही मिलती है।-डॉ. कुमार मंगलम सारस्वत, नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा