मुरादाबाद। 341 करोड़ की टैक्स चोरी के मामले में राज्य कर विभाग की टीमें मास्टर माइंड के ईमेल और मोबाइल नंबरों को खंगालने में जुटी है। किन-किन नंबरों पर ओटीपी जनरेट हुए, इनका ब्योरा जुटाया जा रहा है। ऐसे में टैक्स चोरी 341 करोड़ से अधिक होने की आशंका जताई जा रही है।
दो मोबाइल नंबरों पर देशभर में 122 बोगस फर्म बनाकर 341 करोड़ की जीएसटी चोरी की जांच एसआईटी कर रही है। लखनऊ निवासी मास्टर माइंड लोहा कारोबारी अंकित कुमार ने इन फर्जी फर्मों पर 1811 करोड़ का व्यापार किया है। पंजीयन के लिए उसने सीजीएसटी के सरल नियमों का फायदा उठाते हुए फर्जी अभिलेखों का प्रयोग किया। है। फर्जी ई वे बिल और अभिलेखों के आधार पर केंद्र और राज्य सरकार को करोड़ों का चूना लगाया है लेकिन मुरादाबाद राज्य कर की टीम ने लोहे के लदे दो ट्रकों को पकड़कर प्रदेश की एक बड़ी जीएसटी चोरी का खुलासा किया। इस मामले में राज्य कर विभाग ने सिविल लाइंस थाने में दो केस भी दर्ज कराया है। राज्य कर की टीमें मास्टर माइंड के ईमेल और मोबाइल नंबरों की जांच पड़ताल करने में जुटी है। जांच में लगी टीमें यह देख रही हैं कि किन नंबरों पर ओटीपी जनरेट हुए हैं। ऐसे नंबरों को एक स्थान पर इकट्ठा किया जा रहा है।
00
मुजफ्फरनगर के सौरभ मिश्रा की भी चल रही है जांच
राज्य कर अधिकारी अब अंकित कुमार के साथ उसके साथी मुजफ्फरनगर के सौरभ मिश्रा की जांच कर रही है। प्राथमिक जांच में सौरभ का पता फर्जी पाया गया है। इस मामले में ई- मेल के आधार पर राज्य कर अधिकारी जांच रही है। इस मामले में राज्य कर अधिकारियों ने विभाग के तकनीकी विशेषज्ञों को भी लगाया है। मुख्यालय स्तर से भी जांच की प्रतिदिन की प्रगति रिपोर्ट ली जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि सोमवार या मंगलवार तक इस मामले में प्रगति आने की संभावना है। जांच अधिकारियों का मानना है कि टर्नओवर का दायरा भी बढ़ेगा।
00
गुटखा और लोहे से लदे वाहनों के बदले रास्ते
मुरादाबाद। जीएसटी की कार्रवाई के कारण बोगस फर्मों पर संचालित गुटखा और लोहे से लदे वाहन हाईवे पर इक्का दुक्का ही आए। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई के डर के चलते जीएसटी चोरी करने वालों ने रास्ता बदल दिया है। राज्य कर विभाग द्वारा जीएसटी चोरी के मामले में लगातार कार्रवाई के चलते बोगस फर्मों के माध्यम से कारोबार करने वाले लोहे के व्यवसायी भयभीत हो गए हैं। सभी को अपने रिफंड की चिंता सताने लगी है। इसके पहले गुटखा और सुपारी की खेप लेकर वाहन चालक झारखंड और बिहार से दिल्ली की तरफ जाते थे। इस प्रकार के वाहनों के आवागमन में तीन दिनों से कमी आ गई है। राज्य कर अधिकारियों का मानना है कि बोगस फर्मों के सहारे चलने वाले चालकों ने रास्ता बदल दिया है। पहले सुपारी लदे वाहनों की भरमार रहती थी लेकिन सुपारी की बोगस फर्मों के खिलाफ कार्रवाई के चलते चालकों ने रास्ता बदलना ही उचित समझा है। राज्य कर विभाग लोहा के पहले लकड़ी की बोगस फर्मों के खिलाफ अभियान चला चुका है। लकड़ी की 128 बोगस फर्मों को चिन्हित कर उनको निरस्त कराया गया है। अब नंबर एक में काम करने वाले व्यवसायियों के वाहन लखनऊ - दिल्ली हाईवे से गुजरे हैं।