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Moradabad News: बड़े आर्डर का टोटा, कारखानों में हस्तशिल्प का काम सिमटा

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मुरादाबाद। नोएडा में आयोजित आईएचजीएफ मेले में हस्तशिल्प उत्पादों के लिए व्यवसायिक पूछताछ के 15 दिन बाद भी निर्यातकों को बड़े आर्डर नहीं मिल रहे हैं। इसके कारण पीतलनगरी के कारखानों में हस्तशिल्प का काम सिमट गया है। दिवाली तक कारीगरों से भरे रहे कारखानों में अब सन्नाटा पसरा है। जिले में दो हजार से ज्यादा कारखाने हैं जहां पीतल की सिल्लियों को विश्व प्रसिद्ध उत्पादों में ढाला जाता है। उन पर नक्काशी की जाती है और कारीगरों की मेहनत की पॉलिश से चमकाया जाता है। कारखानेदारों का कहना है कि अब काम खत्म सा हो गया है। ट्रंप के टैरिफ का असर बाजार में साफ दिख रहा है। इससे तमाम दस्तकारों के सामने अजीविका का संकट खड़ा हो गया है। कारखानों में पीतल व अन्य धातुओं को आकार देने वाले कारीगर रिक्शा चलाने को मजबूर हैं। जामा मस्जिद स्थित कारखाने के संचालक जहांगीर का कहना है कि 2019 में पीतल 420 रुपये किलो थी लेकिन अब 600 रुपये प्रति किलो है। कच्चे माल की कीमतों ने घरेलू बाजार में और टैरिफ ने अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर काम को धीमा किया है।
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पीतलनगरी के गली नंबर एक में स्थित ब्रास कारखाना संचालक इरशाद सैफी ने बताया कि एक ओर सेल टेक्स में शुल्क जमा करने के बाद भी अधिकारियों द्वारा भट्ठियों को बंद कराया जा रह है दूसरी ओर आर्डर नहीं मिलने के कारण हस्तशिल्प उत्पाद का काम प्रभावित हो रहा है। इसके कारण काफी आर्थिक नुकसान हो रहा है। वहीं निर्यातकों का कहना है कि तीन महीने से हस्तशिल्प उत्पादों के आर्डर कम मिल रहे हैं। आईएचजीएफ मेले में खरीदारों के आने से आर्डर मिलने की उम्मीद तो जगी थी लेकिन अभी भी हस्तशिल्प उत्पादों के बड़े आर्डर नहीं मिले हैं। निर्यातकों का कहना है कि यदि बड़े आर्डर नहीं मिले तो हमारे साथ ही कारखाना मालिकों और कारीगरों को आर्थिक चोट लगेगी।
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अमेरिका होता है 60 फीसदी निर्यात
मुरादाबाद की आबादी का एक चौथाई हिस्सा किसी न किसी तरह से हस्तशिल्प उद्योग से जुड़ा है। जिले से हस्तशिल्प उत्पाद से सालाना निर्यात का 60 प्रतिशत अमेरिका को होता है। अमेरिका से आर्डर कम मिलने के कारण जिले के निर्यातक दुबई, रूस, यूरोपीय देश, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में बाजार ढूंढ रहे हैं लेकिन इसमें भी उन्हें कोई खास सफलता नहीं मिल रही है।
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-बड़े आर्डर नहीं मिल रहे हैं। निर्यातक उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद कोई राहत की खबर मिले। निर्यातकों को जीएसटी का भी लाभ नहीं मिल रहा है। कारखानों में भी लगातार कारीगरों की छटनी हो रही है। अगर बड़े आर्डर नहीं मिलते हैं तो और भी अधिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
- विकास अग्रवाल, वाइस प्रेसिडेंट, एसईजेड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन
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-व्यापार करने के लिए निर्यातकों ने नए देशों की ओर रुख किया है। लेकिन अभी कोई खास परिणाम नहीं निकला। अमेरिका की नीतियों के चलते संकट खड़ा हुआ है। निर्यातकों में निर्यात को लेकर चिंता व्याप्त है। यदि अमेरिका टैरिफ घटाकर 15 प्रतिशत कर दे तो अच्छे आर्डर मिलने लगेंगे। तीन महीने में 35 प्रतिशत निर्यात घटा है।
- सुरेश कुमार गुप्ता, चेयरमैन, आईआईए हैंडीक्राफ्ट्स डेवलेपमेंट कमेटी
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-कारखानों में पांच प्रतिशत काम बचा है। आर्डर नहीं मिल रहा है। भट्टियां बंद हो रही हैं। तीन महीने पहले छोटे कारखानों में 15 से 20 कारीगर काम करते थे लेकिन अब चार से पांच कारीगर काम कर रहे हैं। निर्यातक, कारखाना मालिक से लेकर कारीगर तक सभी को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
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- नोमान मंसूरी, प्रेसिडेंट, हैंडीक्रॉफ्ट डेवलेपमेंट सोसायटी
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