मुरादाबाद। नगर निगम के वार्ड-3 स्थित बैंक कॉलोनी में बदहाल सड़कें और खुले में बहता नालियों का गंदा पानी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है। कॉलोनी की कई गलियों में सड़कें जगह-जगह से टूटी पड़ी हैं, जबकि कुछ हिस्सों में आज तक पक्की सड़क और नालियों का निर्माण ही नहीं कराया गया। हालात ऐसे हैं कि गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है और लोगों को बदबू व गंदगी के बीच निकलना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार नगर निगम अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। धरातल पर कोई काम नहीं हुआ। बरसात के दौरान स्थिति और भयावह हो जाती है। जलभराव और कीचड़ के कारण पैदल निकलना तक मुश्किल हो जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा दिक्कत उठानी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि नगर निगम टैक्स तो समय पर वसूलता है, लेकिन सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। टूटी सड़कों के कारण आए दिन लोग चोटिल हो रहे हैं। कई स्थानों पर नालियों का पानी घरों के सामने जमा हो रहा है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। कॉलोनीवासियों ने जल्द सड़क और नालियों का निर्माण कराने की मांग की है। महापौर विनोद अग्रवाल का कहना है कि जल्द ही लोगों की शिकायत का समाधान कराया जाएगा।
लोगों के कोट
कॉलोनी में वर्षों से सड़कें टूटी पड़ी हैं। कई बार शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बरसात में हालात इतने खराब हो जाते हैं कि घर से निकलना मुश्किल हो जाता है।
- राजवीर सिंह
नालियों का गंदा पानी लगातार सड़कों पर बह रहा है। बदबू और मच्छरों से लोग परेशान हैं। बच्चों को संक्रमण का खतरा बना रहता है। सफाई और सड़क निर्माण को लेकर जिम्मेदार पूरी तरह लापरवाह बने हुए हैं।
- सतवीर सिंह
टूटी सड़कों के कारण आए दिन बाइक सवार गिर रहे हैं। रात में निकलना और खतरनाक हो जाता है। टैक्स देने के बाद भी कॉलोनी को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
- विमलेश
बरसात में पूरी गली तालाब बन जाती है। स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। कई बार पार्षद और अधिकारियों से कहा, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन देकर मामला टाल दिया गया।
- अमित कुमार
कॉलोनी में न सड़क सही है और न नालियां। गंदगी के कारण बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। जमीन पर लोगों की परेशानियां किसी को नजर नहीं आतीं।
- विवेक
घर के बाहर हमेशा गंदा पानी भरा रहता है। शिकायतों के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा। अधिकारी सिर्फ निरीक्षण करके चले जाते हैं।
- सुमित कुमार