मुरादाबाद। नगर निगम की दुकानों का नया किराया तय करने का मामला एक बार फिर टल गया है। शुक्रवार को प्रस्तावित कार्यकारिणी बैठक में किराया निर्धारण पर चर्चा होनी थी लेकिन पार्षदों के बहिष्कार के चलते बैठक शुरू ही नहीं हो सकी। किराया निर्धारण न होने की वजह से निगम पिछले 11 महीनों से 488 दुकानों से किराया वसूल नहीं कर पा रहा है जिससे उसके राजस्व को भी गहरा नुकसान हो रहा है। इन दुकानों के किराया निर्धारण के लिए तीन महीने पहले महापौर ने एक समिति का भी गठन किया था। समिति में पार्षद अनुभव मेहरोत्रा, गौरव श्रीवास्तव और देशरत्न कत्याल को शामिल किया गया था। इस समिति को अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह के साथ वार्ता करके किराये का निर्धारण करना था जिसे कार्यकारिणी बैठक में मंजूरी मिलनी थी। लेकिन पार्षद समिति की बैठक दो बार हुई और दोनों ही बैठक बेनतीजा रही थी।
पार्षदों ने सर्किल रेट के आधार पर किराया तय करने के प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए चेतावनी दी थी कि यह फार्मूला व्यापारी वर्ग पर भारी बोझ डाल देगा। पार्षदों ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए बैठक का बहिष्कार भी कर दिया था। इसके बाद पार्षदों की समिति ने अपनी ओर से रिपोर्ट तैयार कर महापौर को सौंप दी थी। पार्षदों ने रिपोर्ट में कहा था कि जिन दुकानों का मौजूदा किराया 300 से 500 रुपये है वह सर्किल रेट के हिसाब से तय हुआ तो अचानक से 12-15 हजार रुपये तक का किराया पहुंच जाएगा जिसे व्यापारी वहन नहीं कर पाएंगे। इसी रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय लेने के लिए कार्यकारिणी बैठक में चर्चा होनी थी लेकिन बैठक ही स्थगित हो गई और किराया निर्धारण प्रक्रिया अनिश्चितकाल के लिए फिर टल गई है।
दूसरी ओर व्यापारियों में भी इस मुद्दे को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि 11 महीने से किराया तय न होने के कारण वह असमंजस में हैं। व्यापारी संगठनों का साफ कहना है कि किराया तार्किक रूप से बढ़ाया जा सकता है लेकिन सर्किल रेट लागू करना किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं होगा। दुकानदारों में यह भी भ्रम बना हुआ है कि किराया तय करने के बाद निगम उनसे कब तक की वसूली करेगा क्योंकि जनवरी से लेकर अब तक का किराया एक बार में चुकाना असंभव होगा। ऐसे में किराया जब तय हो तबसे ही उसे वसूला भी जाना चाहिए।